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पेट्रोल पंप की जमीन का फर्जी नामान्तरण करने के मामले में अधिकारियों पर उठे सवाल

फतेहपुर. कोतवाली तिराहे के पास स्थित पेट्रोल पंप की जमीन का फर्जी नामान्तरण करने के मामले में अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। ऑडिट रिपोर्ट आने के नौ माह बाद भी स्थानीय अधिकारियों के द्वारा पालना रिपोर्ट नहीं भेजी गई। पटवारी व अन्य कार्मिकों को बचाने के चक्कर में अधिकारियों ने 9 माह में ना ही तो कर्मचारियों को नोटिस जारी किए व ना ही कोई आरोप पत्र तैयार किए। ऐसे में कर्मचारियों पर होने वाली कार्रवाई कागजों तक ही सिमट कर रह गई। हालात यह है कि अधिकारियों ने फाइल का अध्ययन तक नहीं किया। बुधवार को राजस्थान पत्रिका में खबर छपने के बाद स्थानीय प्रशासन हरकत में आया। एसडीएम रेणू मीणा ने बुधवार को नामान्तरण संबंधी दस्तावेज मंगवाए। दस्तावेजों की जांच कर दोषी कर्मचारियों को नोटिस देने की तैयारी कर ली गई है।

 

 

जानकारी के अनुसार 31 अगस्त 2017 को ऑडिट रिपोर्ट हुई। रिपोर्ट में पटवारी श्रवण कुमार, भू लेख अधिकारी श्रवण व नायाब तहसीलदार सुरेन्द्र सिंह मील को उक्त कृत्य के लिए दोषी मानते हुए कार्रवाई की सिफारिश थी, लेकिन अधिकारियों ने कार्रवाई तो दूर की बात दोषी कर्मचारियों को नोटिस तक जारी नहीं किए। बुधवार को एसडीएम रेणू मीणा, तहसीलदार सुशील सैनी ने फाइल का निरीक्षण किया व दोषी कर्मचारियों को नोटिस जारी करने के आदेश दिए। गुरूवार को दोषी कर्मचारियों को नोटिस जारी किए जाएगें। गौरतलब है कि कोतवाली तिराह के पास स्थित पेट्रोल पंप के लिए जिला कलेक्टर की ओर से भूमि लीज पर आंवटित हुई थी। इसके बाद कर्मचारियों ने वर्ष 2015 में उक्त भूमि को पेट्रोल पंप मालिक के नाम कर दिया। 2017 में हुई ऑडिट की रिपोर्ट में उक्त बात का खुलासा हुआ। ऑडिट ने नामान्तरण को गलत मानते हुए दोषियों पर कार्रवाई करने की बात कही।

 

अधिकारियों ने किया नाप जोख
कोतवाली तिराहे के पास स्थित पेट्रोल पंप पर चल रहे निर्माण कार्य को देखने व जमीन का नाम करने के लिए गुरू वार को अधिकारियों ने भाग दौड़ की। वन विभाग के रेंजर, भेड़ एवं ऊन प्रजनन केन्द्र के उप निदेशक, गिरदावर, पटवारी ने जमीन का नाप जोख लिया। नाप जोख में पाया गया कि उक्त भूमि वन विभाग की ना होकर राजस्व विभाग के नाम थी। इसलिए निर्माण कार्य नहीं रुकवाया गया। अब नगर पालिका मण्डल से निर्माण कार्य की स्वीकृति के संबंध में पूछा जाएगा। वहीं विभाग की ओर से दोषी कार्मिकों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं।



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