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जिले में डेढ़ लाख से अधिक बच्चे पीएंगे एक करोड़ रुपए का दूध

चूरू.

राज्य सरकार की मंशा के मुताबिक प्रारंभिक शिक्षा विभाग की योजना लागू हुई तो आगामी दो जुलाईसे सरकारी स्कूलों में बच्चे एक करोड़ रुपए से अधिक का दूध गटकेंगे। योजना के मुताबिक मिड-डे-मील के तहत सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे कक्षा एक से पांच तक प्रत्येक बच्चे को सप्ताह में तीन दिन 950 एमएल व कक्षा छह से आठ तक के प्रत्येक बच्चे को 200 एमएल दूध दिया जाएगा। जिले में कक्षा एक से पांच तक के बच्चों की संख्या वर्तमान में एक लाख चार हजार 781 व छह से आठ तक के 59 हजार 589सहित कुल एक लाख 64हजार 70विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। इस छात्र संख्या के हिसाब से प्रतिदिन 27 हजार 575 लीटर दूध की जरूरत होगी। महीने में 12 दिन के हिसाब से हर महीने स्कूलों को तीन लाख 30हजार 900 लीटर दूध की जरूरत होगी। विभाग के मुताबिक शहरी क्षेत्र में दूध रजिस्टर्डडेयरी से अधिकतम ४० रुपए प्रति लीटर व ग्रामीण क्षेत्रों में महिला दूध उत्पादक समितियों के अलावा अन्य माध्यमों से 35 रुपए लीटर की दर से जुटाया जाएगा। शहरी व ग्रामीण दरों को मिलाकर औसतन35 रुपए के हिसाब से भी जोड़ें तो प्रतिदिन एक लाख 64 हजार 70 विद्यार्थियों के लिए नौ लाख 65 हजार 125रुपए का दूध लगेगा। महीने के 12 दिन में एक करोड़15 लाख 81 हजार 500 रुपए दूध पर खर्च होंगे। आगामी नौ जून से शुरूहोने वाले शाला प्रवेशोत्सव में नामांकन बढऩे पर ये आंकड़ा बढऩा तय है।

 

अधिकारी असमंजस में
योजना के सुचारू संचालन के लिए की जाने वाली दूध खरीद व वितरण सहित अन्य व्यवस्थाओं में जुटे विभाग के अधिकारी भी असमंजस में है कि इतना दूध आएगा कहां से। क्योंंकि डेयरी में मिलने वाला दूध भी गांवों से संग्रहित करके ही सप्लाई किया जाता है। भीषण गर्मीके इस मौसम में पहले से ही पशुओं में दूध सूखने से दूध उत्पादन में कमी आ रही है। दूध के लिए किसी से भी नियमित बंधी तो शुरू की जा सकती है। मगर सप्ताह में तीन दिन दूध का इंतजाम करने में परेशानी होगी। स्कूलों में होने वाली प्रतिदिन की दूध की खपत जिले की सरदारशहर डेयरी में होने वाली दूध की आवक से अधिक होगी। गौरतलब है कि सरदारशहर में चल रही डेयरी में जिले के ३०० गांवों से २० हजार लीटर दूध आ रहा है। जबकि स्कूलों में प्रतिदिन २७ हजार ५७५ लीटर दूध की खपत होगी।

 

विभाग को मिला दो करोड़ का बजट
मिड-डे-मील प्रभारी विजयपाल धुआं के मुताबिक योजना के संचालन के लिए सरकार से दो करोड़, 81 लाख 51हजार रुपए का बजट मिला है। जिसमें दूध के लिए दो करोड़ 11 लाख ६१ हजार रुपए, बर्तन के लिए35 लाख81 हजार व गिलास के लिए 34 लाख नौ हजार रुपए का बजट मिल चुका है।

 

पांच को करेंगे योजना की समीक्षा
जिला स्तरीय पोषाहार समीक्षा एवं संचालन समिति की बैठक पांच जून को दोपहर साढ़े 12 बजे होगी। बैठक में जिलों के संबंधित अधिकारी योजना के क्रियान्वयन को लेकर अब तक की तैयारियों की समीक्षा करेंगे। अधिकारी योजना में आने वाली संभावित चुनौतियों से निपटने के उपायों पर भी चर्चा करेंगे।

योजना को लेकर सरकार से बजट मिल चुका है। क्रियान्वयन के लिए जिलेभर में तैयारियां चल रही है।
विजयपाल धुआं, प्रभारी मिड-डे-मील, कार्यालय प्रारंभिक शिक्षा, चूरू



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