कोटा . राजस्थान समेत 2 अन्य राज्यों के चुनावों से पहले बढ़ती महंगाई की खबरें मोदी सरकार के लिए चिंता का सबब बन सकती है। हाल ही में सामने आए नए आंकड़ों के मुताबिक खाद्यान्नों और ईधन की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के कारण मई में थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति बढ़कर 4.43 फीसदी हो गई, जबकि पिछले साल के इसी महीने में यह 2.26 फीसदी दर्ज की गई थी। ये 14 महीने का सबसे ऊंचा स्तर है। इससे पहले मार्च 2017 में ये 5.11 फीसदी थी। इस साल अप्रैल में यह दर 3.18 फीसदी थी। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों से गुरुवार को यह जानकारी मिली। इससे पहले इसी सप्ताह जारी आंकड़े में खुदरा महंगाई भी मई माह में बढ़कर चार महीने के उच्चतम स्तर 4.87 प्रतिशत पर पहुंच गई थी। गौरतलब है कि इससे पहले भारतीय रिजर्व बैंक ने जून के पहले हफ्ते रेपो रेट बढ़ाकर 6.25 कर दिया था।
रोजगार : 24 साल बाद नेहरू युवा केन्द्र में निकली बंपर भर्ती, यहां से करें आवेदन ...
चुनावों में महंगाई बन सकता है बड़ा मुद्दा
साल के अंत में होने वाले चुनावों से पहले विपक्ष, पीएम मोदी समेत राज्य सरकारों को महंगाई के मुद्दे पर घेरने की कोशिश कर सकता है। गौरतलब है कि यूपीए के समय तत्कालीन गुजरात के सीएम और मौजूदा पीएम नरेंद्र मोदी ने चुनावी कैंपेन के समय बढ़ती महंगाई पर मनमोहन सरकार की जमकर आलोचना की थी। मौजूदा समय में तीनों राज्यों भाजपा की सरकार है।
2 सूचकांकों के आधार पर तय होती है महंगाई
1. थोक महंगाई के लिए थोक मूल्य सूचकांक
इसमें 435 वस्तुएं शामिल होती हैं। डब्ल्यूपीआइ में शामिल ये वस्तुएं अलग-अलग वर्गों में बांटी जाती हैं। थोक बाजार में इन वस्तुओं के समूह की कीमतों में हर बढ़ोतरी का आंकलन थोक मूल्य सूचकांक के जरिए होता है। इसकी गणना प्राथमिक वस्तुओं, ईंधन और अन्य उत्पादों की महंगाई में बदलाव के आधार पर की जाती है।
Read More: अब बिना लाइन में लगे आसानी से मिलेगा जनरल टिकट
2. खुदरा महंगाई के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक
खुदरा महंगाई वह दर है, जो जनता को सीधे तौर पर प्रभावित करती है। यह खुदरा कीमतों के आधार पर तय की जाती है। भारत में खुदरा महंगाई दर में खाद्य पदार्थों की हिस्सेदारी करीब 45 फीसदी है। दुनिया भर में ज्यादातर देशों में खुदरा महंगाई के आधार पर ही मौद्रिक नीतियां बनाई जाती हैं।
पेट्रोल-डीजल की कीमतों से बढ़ोतरी से उद्योगों की भी लागत बढ़ जाती है, इससे उनकी मुनाफाप्रदाता पर असर होने लगता है।
डी. एस. रावत, महासचिव, एसोचैम





No comments:
Post a Comment