झालावाड़. हवा में नमी अथवा सूखापन, भारी बारिश की चेतावनी जैसी सूचनाएं सरकार, प्रशासन सहित आमजन व किसानों के लिए खास होती है। इससे मौसम का आंकलन भी होता है लेकिन खुद सरकार ही यह सूचनाएं संकलित करने वाले सिस्टम के लिए बजट ही जारी नहीं कर रही है। इससे जिले के लोगों को भारी बारिश व सूखे, तेज हवा व नमी आदि की सूचनाएं नहीं मिल पा रही है। तो जिले में सिंचाई विभाग के पास भी मौसम का पूर्वानुमान और आंकलन का कोई साधन नहीं है। बरसात के आंकड़ों के लिए भी वह अपने जलाशयों पर लगे गेज पर ही निर्भर है।
शहर में बनना था आधुनिक स्टेशन
जिले में दो वर्ष पहले विशेष मौसम केन्द्र की स्थापना के प्रस्ताव बनाकर भेजे थे। यह स्टेशन ऑटोमैटिक मौसम की जानकारी देने वाला आधुनिक स्टेशन बनना है लेकिन अभी तक बजट नहीं आने से मौसम केन्द्र अभी तक आकार नहीं ले पाया है। इस संबंध में पूना व मौसम विभाग के प्रधान कार्यालय दिल्ली भी कई बार पत्र भेज दिए लेकिन इस ओर किसी का ध्यान नहीं होने से जिले में इस केन्द्र की स्थापना नहीं हो पा रही है।
केवल बारिश ही नापता है विभाग
जिले में मौसम की सटीक जानकारी देने वाला कोई अधिकारी मौजूद नहीं है। जिले में सिंचाई विभाग साल में चार महीने सिर्फ बरसात ही मापता है। जिले में 15 जून से 30 सितम्बर तक मानसून का दौर माना जाता है। इस दौरान जिले में होने वाली बरसात और जलाशयों में पानी की आवक का विभाग प्रतिदिन का रिकॉर्ड तैयार करता है। लेकिन इनके लिए जलाशयों में लगे गेज पर ही निर्भर है। कई बार जलाशयों के वास्तविक गेज और बरसात की सूचनाओं में फर्क भी मिलता है। जिले में कहीं भी वर्षामापी यंत्र लगे हुए नहीं हैं।
यहां लगना था यंत्र
जिले में मौसम केन्द्र की स्थापना पॉलीटेक्निक महाविद्यालय में की जानी थी लेकिन बजट नहीं आने से अभी तक नहीं हुई है। यहां वैधशाला 10 गुणा 7 के एरिये में बनाए जानी थी। इसमें विज्ञान व भूगोल की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति की नियुक्ति भी की जाएगी लेकिन पूना से आने वाले स्टीवेशन स्टीम व रेन गेज, एनोमोमीटर, विंड स्पीड मापने का यंत्र, आद्र्रता मापने के लिए हाइग्रोमीटर नहीं आए। मौसमशाला के लिए पॉलीटेक्निक कॉलेज व मौसम विभाग के निदेशक के बीच 28 जून 2017 को एमओयू साइन हुआ था। लेकिन पूरा एक वर्ष होने के बाद भी अभी तक इस दिशा में कोई काम नहीं हुआ है। इसके चलते मौसम की व जिले में होने वाली वर्षा की सटीक जानकारी भी नहीं मिल पाती है।
& पॉलीटेक्निक कॉलेज में मौसम वैधशाला की स्थापना के लिए एमओयू साइन हुए थे। लेकिन अभी बजट नहीं आने से कोई काम नहीं हुआ है।
राजुल गोयल, प्राचार्या, पॉलिटेक्निक कॉलेज, झालावाड़





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