जैसलमेर. सरकारी स्कूलों में मिड डे मील के तहत सप्ताह में तीन दिन पहली से आठवीं तक के विद्यार्थियों को दूध पिलाने वाली राज्य सरकार की अन्नपूर्णा दूध योजना को लेकर शिक्षक समाज में खलबली मची हुई है। इस संबंध में सरकार की ओर से जारी की गई गाइड लाइंस से शिक्षकों में असमंजस की स्थिति है। सरकारी फरमान के अनुसार प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक कक्षाओं में पढऩे वाले विद्यार्थियों को मध्याह्न भोजन योजना के तहत आगामी 2 जुलाई से दूध भी मुहैया करवाया जाना है।सप्ताह में एक दिन छोडकऱ दूसरे दिन यानी तीन बार दूध पिलाया जाएगा। पहली से पांचवीं में पढऩे वाले विद्यार्थियों को 150 मिलीलीटर और छठी से आठवीं कक्षाओं में पढऩे वालों को 200 मिलीलीटर दूध पिलाया जाएगा।
कैसे होगी दूध की व्यवस्था
सरकारी निर्देशानुसार शहरी क्षेत्र में विद्यालयों को सहकारी डेयरी से दूध खरीदना है तो ग्रामीण क्षेत्रों में डेयरी अथवा किसी सहकारी संस्था या महिला स्वयं सहायता समूह से। जैसलमेर जैसे विरल आबादी वाले और विशाल क्षेत्रफल में फैले जिले के अनेक ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसी संस्थाएं और सहायता समूह ही नहीं बने हैं। तब वहां दूध की खरीद कहां से की जाएगी, यह सवाल शिक्षकों को परेशानी में डाल रहा है। विद्यालयों में दूध की गुणवत्ता की जांच से लेकर उसे गर्म कर वितरण करने तक की व्यवस्थाओं में खर्च होने वाले समय पर भी शिक्षक चिंता जता रहे हैं। उनके अनुसार तेज गर्मी के मौसम में ग्रामीण क्षेत्रों में दूध को फटने से बचाना मुश्किल भरा कार्यसाबित हो सकता है।
इन बर्तनों की रहेगी जरूरत
सरकारी निर्देशानुसार अन्नपूर्णा दूध योजना के लिए विद्यालय में 18 गेज स्टील के भगोने, टोटी युक्त स्टील टंकी और विद्यार्थियों की संख्या के अनुपात में स्टील की गिलासें खरीदनी है। जानकारी के अनुसार सरकारी स्कूलों के शिक्षक इन बर्तनों की खरीद के लिए जारी 2500 रुपए की राषि को कम बता रहे हैं और उन्हें बाजार में निर्धारित मापदंड के बर्तन भी आसानी से उपलब्ध नहीं हो पा रहे। राजस्थान शिक्षक एवं पंचायतीराज कर्मचारी संघ के प्रदेश मंत्री प्रकाश विश्नोई ने बताया कि यह योजना दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों में पदस्थापित शिक्षकों के लिए गलफांस बन सकती है।
हो जाएगी व्यवस्था
अन्नपूर्णा दूध योजना आगामी 2 जुलाई से सभी प्राथमिक सेटअप के विद्यालयों में शुरू हो जाएगी। दूध से लेकर अन्य व्यवस्थाएं सफलतापूर्वक हो जाएगी।इसकी पुख्ता मोनेटरिंग की जानी है।
-मन्नाराम मीना, कार्यवाहक जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक, जैसलमेर





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