सीकर. वाहवाही लूटने के लिए राज्य सरकार ने सहकारी बैंकों के किसानों के ऋण माफ करने की घोषणा कर दी हो लेकिन ऋण माफी की घोषणा के बाद अधिकांश सहकारी बैंकों के खजाने खाली हो गए। बैंकों के ऋण की भरपाई के लिए सरकार की ओर से किसी प्रकार का बजट नहीं दिए जाने से बैंकों में रिकवरी भी नाममात्र की हो पाई है। जिसका असर खरीफ सीजन में वितरित किए जाने वाले ऋण पर पड़ेगा। साथ ही सहकारी क्षेत्र में नए सदस्य नहीं बन पाएंगे। गौरतलब है कि सीकर केन्द्रीय सहकारी बैंक की और से हर वर्ष खरीफ सीजन में करीब सवा लाख सदस्य किसानों को ब्याज मुक्त ऋण दिया जाता है।
ऐसे पड़ेगा असर
सहकारी बैंक में राज्य सरकार की पूंजी होती है। ये बैंक नाबार्ड से राशि लेकर किसानों को ब्याज मुक्त फसली ऋण व दीर्घकालीन ऋण उपलब्ध कराते हैं। इसके लिए ब्याज राशि पर केन्द्र और राज्य सरकार की ओर से अनुदान दिया जाता है। ऋण वितरण की प्रणाली धीमी होने के कारण सदस्य किसानों के पास ऋण की राशि नहीं पहुंचेगी। जिसका असर खरीफ की बुवाई और उत्पादन पर पड़ेगा।
पिछले वर्ष 60 फीसदी रिकवरी
सीकर केन्द्रीय सहकारी बैंक में पिछले वर्ष मई माह में 258 करोड 20 लाख का ऋण बांटा गया था। बैंक की ओर से 2016 में बांटे गए ऋण की 60 फीसदी रिकवरी हो गई थी। वहीं इस साल फरवरी माह से किसानों के ऋण माफ होने की खबर के साथ ही बैंक की रिकवरी घटती गई और यह आंकड़ा चिंताजनक स्तर तक पहुंच गया। बैंक की ओर से आमतौर पर 30 जून तक खरीफ सीजन का ऋण बांटा जाता है और नए सदस्य बनाए जाते हैं।
पड़ेगा असर
ऋण माफी की घोषणा का असर सहकारी बैंकों की आर्थिक स्थिति पर पड़ेगा। हालांकि सरकार से ऋण माफी की राशि मिलने पर सहकारिता को बढ़ावा मिलेगा।
-सुरेन्द्र सिंह पूनिया, एमडी, सीकर केन्द्रीय सहकारी बैंक





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