सीकर.
एसके अस्पताल में संचालित मातृ एवं शिशु इकाई में प्रसूताओं की ओर से की गई शिकायतों को प्रबंधन ने ठंडे बस्ते में डाल दिया है। हाल यह है कि पिछले चार साल के दौरान प्रसूताओं के परिजनों की ओर से बख्शीश लेने की शिकायतों पर प्रबंधन ने कमेटियां तो बना दी लेकिन अभी भी 16 शिकायत लम्बित चल रही है। कई शिकायतें तो बंद भी हो गई और परिजनों को इसका पता तक नहीं चल पाया है। वहीं जांच के दौरान कई शिकायतों के पते ही गलत निकल रहे हैं। कई शिकायतों में तो बयान ही दर्ज नहीं हो पाए हैं। इधर प्रसूताओं का कहना है कि विभाग जांच के नाम पर शिकायतों को टरकानें की कोशिश में है।
यह है कारण
बख्शीश के प्रकरणों में बनाई गई कमेटी में चिकित्सकों और नर्सिंग स्टॉफ को ही शामिल कर लिया गया है। इस कारण जांच प्रक्रिया बाधित हो रही है। आरोप है कि अब तक जिन दो प्रकरणों का निस्तारण हुआ है वे भी सही नहीं हुए हैं। हाल में सालासर स्टैंड स्थित जनाना अस्पताल में अभी तो कैमरे ही नहीं लगे हुए हैं जिससे शिकायत पर कार्रवाई नहीं हो सकती है और न ही कमेटी को पूरे प्रकरण की जानकारी हो पाएगी।
केस 01
एसके अस्पताल में 2015 में संचालित एमसीएम विंग में रिणाऊ की प्रसूता के परिजनों ने बक्शीश लेने की शिकायत दी थी। एमसीएच विंग में लगे कैमरों में पुष्टि भी हो चुकी थी। इसके बाद जांच कमेटी बना दी और परिजन को बयान देने के लिए बुलाने पर नर्सिंग कर्मचारियों ने दवाब बनाया तो बयान ही नहीं हो पाए।
केस 02
वर्ष 2012 में किकरालिया निवासी प्रसूता के पुत्र जन्म होने पर स्टॉफ ने बक्शीश के रुपए मांगे। प्रकरण में पता चला कि जिस गांव का पता लिखा था उस गांव की वह महिला ही नहीं थी। प्रकरण को बंद कर दिया गया। आरोप है कि विभाग महिलाओं की समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रहा है।
केस 03
वर्ष 2017 में लक्ष्मणगढ में हरसावा में सडक़ हादसे के दौरान मृत्यु होने पर परिजनों से मोर्चरी में कफन के लिए 300 रुपए मांगे। कमेटी ने जांच कि तो सबंधित कर्मचारी ने रुपए लेने की घटना से मना कर दिया। इस प्रकरण में कोई कार्रवाई नहीं हुई।
नहीं करते सहयोग इसलिए पेंडिंग
प्रसूताओं से बख्शीश के मामले में शिकायत कर्ता की ओर से सहयोग नहीं किया जा रहा है। इस कारण प्रकरणों में बयान दर्ज नहीं होते हैं और शिकायतें लम्बित है। जब भी शिकायत कर्ता आकर बयान देगा तो तुरंत ही फाइल का निरस्तारण कर दिया जाएगा। - डॉ. हरि सिंह, डिप्टी कंट्रोलर, एसके अस्पताल सीकर





No comments:
Post a Comment