Breaking News
recent

environment day special : राजस्थान के इस शहर में पांच सालों मे इतने गुना बढ़ा प्रदुषण, इसकी वजह जानकर आप भी हैरान हो जाएंगे

अजमेर . पूरी दुनिया जहां ग्लोबल वार्मिंग का शिकार हो रही है वहीं अजमेर शहर भी इससे अछूता नहीं है। इसका मुख्य कारण पेड़ों की कमी को तो माना ही जाता है, लेकिन वाहन और इलेक्ट्रिक सामानों का भी इसमें बड़ा योगदान है। बीते के एक साल से शहर में वाहनों की संख्या में 12.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

अजमेर परिवहन जिले में वर्तमान में करीब साढ़े चार लाख वाहन हैं। 2013 से अब तक सड़कों पर करीब 2 लाख वाहन आ चुके हैं। केवल 2017 में करीब 40000 हजार वाहन सड़कों पर आए हैं। यह संख्या 2016 में आए वाहनों के मुकाबले करीब 5 हजार वाहन ज्यादा है। वाहनों की संख्या के साथ क्षेत्र में प्रदूषण भी बढ़ा। वहीं लेकिन इस अनुपात में पौधरोपण नहीं हुआ। इससे पर्यावरण पर भी विपरीत असर पड़ा। बीत पांच सालों में प्रदूषण डेढ़ से दो गुना बढ़ गया है।
परबतपुरा और गांधी भवन चौराहे पर सबसे ज्यादा प्रदूषणपर्यावरणविद प्रो. के.सी. शर्मा के अनुसार जनसंख्या विस्तार पर्यावरण प्रदूषण का मुख्य कारण है। शहर में प्रदूषण बढऩे का मुख्य कारण ट्रैफिक की धीमी गति भी है। शहर में सबसे ज्यादा प्रदूषण परबतपुरा बाइपास और गांधी भवन चौराहे के आसपास है। परबतपुरा में औद्योगिक इकाइयों के कारण और गांधी भवन क्षेत्र में वाहनों के अत्यधिक ठहराव के कारण यह हालात है। इसके कारण कार्बन डाई ऑक्साइड, कार्बन मोनो ऑक्साइड और सल्फर डाई ऑक्साइड गैसों का उत्सर्जन बढ़ता है।

 

in this city pollution increase day by day because of this reason

एसी का भी योगदान
प्रदूषण बढ़ाने में ज्यादा खपत वाले बिजली उपकरणों का भी बहुत योगदान है। इनमें एसी प्रमुख है। 2018 में एसी की ब्रिकी में करीब 25 प्रतिशत इजाफा हुआ है। पहले जहां अधिकतर दफ्तरों में ही एसी ज्यादा पाए जाते थे। वहीं बीते कई सालों से घरों में एसी होना आम होता रहा है। वहीं रेफ्रिजरेटर की बिक्री में एसी के मुकाबले कम ही वृद्धि हुई। लोगों की दिलचस्पी अब बड़े रेफ्रिजरेटर में ज्यादा है। ज्योति इलेक्ट्रिोनिक्स के हरीश कोरवानी के अनुसार एसी की ब्रिकी में पिछले कई सालों से लगातार बढ़ती जा रही है। इसमें घरेलू उपभोक्ताओं का बड़ा हाथ है। उनके अनुसार पर्यावरण के मद्देनजर 2017 से ग्रो-ग्रीन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसे लगातार अपडेट किया जा रहा है, ताकि पर्यावरण संरक्षित रहे।

 

ज्यादा बिजली खपत
प्रो. के.सी. शर्मा के अनुसार एसी में से क्लोरो प्लोरो कार्बन गैस होती है। इसके रिसाव के कारण पर्यावरण को नुकसान होता है। बिजली की खपत बहुत ज्यादा होती है। बिजली का उत्पादन में बहुत कोयले का प्रयोग किया जाता है, क्योंकि हमारे यहां सबसे ज्यादा बिजली कोयले से ही बनाई जाती है। कोयले के अलावा अन्य साधनों से बिजली उत्पादन कम ही होता है।

 

ऐसे करें बचाव

-वाहनों का प्रयोग आवश्यकता अनुसार करें।
-जहां तक हो पब्लिक ट्रांसपोर्ट का प्रयोग करेंगे।

-यदि दो लोगों को एक ही स्थान पर जाना हो तो एक वाहन का प्रयोग करें।
-बिजली के उपकरणों को इस्तेमाल के बाद बंद कर दे।

-आवश्यकता के अनुसार ही एसी चलाएं।



Rajasthan Darpan IFTTT

Rajasthan Darpan IFTTT

No comments:

Post a Comment

Powered by Blogger.