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'ईमानदारी का उत्सव’ GST पर बड़ा खुलासा, दो महीने में हुई 2000 करोड़ टैक्स की चोरी

नर्इ दिल्ली। पिछले साल 1 जुलार्इ काे 'वन नेशन वन टैक्स' के नारे से वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के बाद ये भी कहा जा रहा था कि ये 'र्इमानदारी का उत्सव' है लेकिन ठीक एक साल बाद जीएसटी के तहत टैक्स चोरी का एक बड़ा खुलासा हुआ है। बीते सालभर से मोदी सरकार वस्तु एवं सेवा कर को लेकर अपनी कामयाबी का ढिंढोरे पीट रही थी उसी जीएसटी कर प्रणाली की जांच शाखा ने दो महीने के भीतर 2,000 करोड़ रुपये की कर चोरी का खुलासा किया है। आंकड़ों के मुताबिक 1.11 करोड़ से अधिक कारोबारी रजिस्टर्ड है लेकिन उनमें से सिर्फ एक फीसदी ने ही 80 फीसदी करों का भुगतान किया है ।


छोटे कारोबारी कर रहे है ज्यादा गलतियां

इस तरह चल रही जोरो से टैक्स चोरी पर सीबीआईसी के सदस्य जॉन जोसेफ का कहना है की गलती करने वालों में ज्यादातर छोटे कारोबारी है ऐसा नही है की बड़े कारोबारियों से गलती नहीं हुई है पर रिटर्न फाइलिंग में ज्यादा गलती छोटे कारोबारियों ने की है। वैसे तो कर अदा करने के तरीके काफी सतर्क और स्पष्ट फिर भी हम ये जरूर पाता करेगे की सिस्टम में कहां गलतियां हो रही है ।

जीएसटी पर जोसफ की सलाह

जोसफ ने एक समारोह को संबोधित करते ये कहा की एक रिर्पोट से ये पता चला है की अधिकतर कारोबारियों का वार्षिक कारोबार 5 लाख रुपये का या उससे अधिक है । फिर भी कर में चोरी हो रही है इससे ये स्पष्ट है की जीएसटी को सही ढंग से लागू करने की और जरूरी बदलाव करने की जरुरत है । कम्पोजिशन स्कीम के तहत कारोबारियों और उत्पादकों को 1 फीसदी की कम दर पर टैक्स चुकाने की अनुमति है, जबकि रेस्तरां मालिकों को 5 फीसदी की दर से जीएसटी भुगतान करना पड़ता है। यह योजना उत्पादकों, रेस्तरां और व्यापारियों के लिए खुली है, जिनका कारोबार 1.5 करोड़ रुपये से अधिक नहीं है।


पता लगाई कई छोटी चोरीयां

जोसफ आगे बताते है की दो महीने से भी कम समय में हमने चल रही कई छोटी-छोटी चोरी का भी पता लगाया है । उन्होंने ये भी कहा की जीएसटी इंटेलिजेंस विंग जीएसटी चोरी रोकने के लिए व्यापक स्तर पर कार्रवाई करने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए तकनीक की भी मदद ली जाएगी।



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