अजमेर . बारहवीं कला वर्ग में इस साल आखिर सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थी निजी विद्यालयों से बेहतर साबित हुए। सरकारी विद्यालयों का परीक्षा परिणाम 90.31 प्रतिशत रहा जो निजी विद्यालयों के परिणाम 89.05 प्रतिशत से बेहतर रहा। हालांकि फिनिशिंग लाइन पर यह अंतर काफी मामूली 1.48 प्रतिशत रहा। शिक्षा राज्य मंत्री वासुदेव देवनानी ने इस अंतर को सकारात्मक परिणाम बताया है। उन्होंने परिणाम जारी करते हुए कहा कि सरकारी विद्यालयों में पिछले कुछ वर्षो से सुविधाएं बढ़ाई गई है।
बेहतर शिक्षकों की नियुक्ति, संसाधन कम होने के बावजूद बच्चों की मेहनत और शिक्षकों के प्रयास की बदौलत आखिर सरकारी विद्यालय के गरीब बच्चों ने साधन संपन्न निजी विद्यालयों से बेहतर परिणाम हासिल किए। उन्होने कहा कि बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओं की मुहिम रंग लाई है और लड़कियां शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर परिणाम हासिल कर रही है। उन्होने कहा कि चार वर्ष पूर्व तक शिक्षा बोर्ड की परीक्षा का परिणाम 70 से 75 प्रतिशत तक आता था लेकिन अब राज्य में बेहतर शैक्षिक वातावरण की बदौलत यह परिणाम 90 प्रतिशत के आसपास आने शुरू हुए हैं।
23 हजार से अधिक के सप्लीमेंट्री
नियमित विद्यार्थियों का परिणाम 89.87 प्रतिशत जबकि स्वयंपाठी विद्यार्थियों का परिणाम महज 23.81 प्रतिशत रहा। परीक्षा में प्रथम श्रेणी में 2 लाख 18 हजार 606, द्वितीय श्रेणी में सर्वाधिक 2 लाख 25 हजार 291, तृतीय श्रेणी में 24 हजार 864 एवं 230 महज उत्तीर्ण हुए। कुल 23 हजार 231 विद्यार्थियों को पूरक योग्य घोषित किया गया है। इनमें 13 हजार 836 लड़के और 9 हजार 395 लड़कियां हैं।
सिरोही अव्वल, दौसा फिसड्डी
अजमेर. माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान की सीनियर सैकंडरी कला वर्ग में सिरोही जिला परीक्षा परिणाम के लिहाज से पूरे राज्य में प्रथम आया है जबकि दौसा पूरे राज्य में अंतिम पायदान पर है। सिरोही जिले का परीक्षा परिणाम 92.53 प्रतिशत रहा। राजसमंद 92.09 प्रतिशत परिणाम के साथ राज्य में दूसरे और भीलवाड़ा जिला 91.76 प्रतिशत परिणाम के साथ तीसरे स्थान पर रहा। इस परीक्षा में दौसा जिला सबसे कम परिणाम 83.43 प्रतिशत के साथ पूरे राज्य में फिसड्डी रहा।





No comments:
Post a Comment