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Video: सरहद पर अमर प्रेम की दास्तां कहती मजारें

अनूपगढ. भारत-पाक अन्तर्राष्ट्रीय सीमा स्थित गांव 6 एमएसआर बिंजौर में विश्व प्रसिद्ध प्रेमी जोड़े लैला मजनू की मजारों पर लगने वाले मेले की तैयारियां जोरों-शोरो से चल रही है। मेला कमेटी के प्रधान बलजीत सिंह, कोषाध्यक्ष गणपत राम, सचिव चरण सिंह सहित अन्य कार्यकारिणी ने बताया कि इस वर्ष मेला 11 जून से 15 जून तक चलेगा। उन्होंने बताया कि मेले में हर वर्ष की तरह इस बार भी बाहर से आए कलाकारों द्वारा अखाड़ा लगाकर लोगों का मनोरंजन किया जाएगा।

 

इसके अलावा कुश्ती ओपन कब्बडी बॉलीबाल प्रतियोगिता के आयोजन के साथ साथ महिला कब्बडी प्रतियोगिता आयोजित करवाई जाएगी। आस्था तथा श्रद्धा की प्रतीक मज़ारे लैला मजनू की मजारों के प्रति हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख तथा प्रत्येक धर्म के लोग आस्था रखते है। वैसे तो रोज ही कोई ना कोई इन मजारों पर नमक, प्रसाद, झंडी आदि चढ़ाकर मन्नत मानते है, लेकिन 11 से 15 जून के बीच पंजाब, हरियाणा, दिल्ली सहित राजस्थान के विभिन्न भागों से इन मजारों पर लोग मन्नत मांगने के लिए पहुंचते है तथा श्रद्धा से शीश नवाते है।

 

भारत- पाक अंर्तराष्ट्रीय सीमा पर स्थित मज़ारे हिन्दू मुस्लिम एकता तथा सद्भावना का संदेश देती है।गांव के बुजुर्ग बताते है कि तारबंदी से पूर्व यहां पाकिस्तान से लोग आकर मन्नते मानते थे। बढ़ रही मान्यता यह दो मज़ारे लैला मजनू की है इसका कोई आधिकारिक प्रमाण नही मिले है। लेकिन लैला मजनू के नाम से प्रसिद्ध इन मजारों की मान्यता दिन बदिन बढ़ रही है।

 

पहले यह मेला एक दिन का लगा करता था, लेकिन धीरे धीरे बढ़ती भीड़ के कारण मेला कमेटी ने इसे पिछले कुछ वर्षों से 5 दिन का कर दिया है, मेले के अंतिम दो दिन बहुत ज्यादा भीड़ हो जाती है। इनकी मौत कैसे हुई इसका भी कोई प्रमाण नही है। कुछ लोगों का मत है कि घर से भाग कर दर.दर भटकने के बाद वे यहां तक पहुंचे, प्यास से उन दोनों की मौत हो गई।इसी कारण यह मान्यता भी बनी कि घग्घर नदी में आने वाला पानी पूरे उफान के बावजूद इन मजारों को नही छूता।



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