धर्मेन्द्र यादव
अलवर. देश पर न्योछावर होने वाले शहीदों के परिवारों को राज्य सरकार के स्तर पर आम आदमी से कम तवज्जो मिलने लगी है। तभी तो पिछले दिनों जयपुर में आयोजित प्रधानमंत्री के लाभार्थी संवाद कार्यक्रम में अलवर के खेरली के निकट समूची गांव की महिला वैकुण्ठी देवी की दुर्घटना में मौत होने पर सरकार ने हाथोंहाथ 10 लाख रुपए महिला के परिवार को थमा दिए जबकि इसी साल अलवर जिले में फरवरी, मार्च व जून माह में शहीद हुए परिवारों को राज्य सरकार से कोई सहायता नहीं मिली है।
ये है शहीद पैकेज
शहीद होने पर मुख्यमंत्री कोष से तुरंत एक लाख रुपए की आर्थिक सहायता जारी होनी चाहिए। इसके अलावा 25 बीघा जमीन या फ्लैट या 20 लाख रुपया नकद दिए जाने चाहिए। परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी, गांव के स्कूल का नामकरण, परिवार को नि:शुल्क बस पास व बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा का पैकेज राज्य सरकार से मिलना चाहिए। जो अभी तक इनमें से किसी भी परिवार को नहीं महिला है। अभी तक एक लाख रुपए की सहायता ही नहीं मिली है।
बुजुर्ग माता-पिता व 15 दिन का मासूम छोड़ गए
बानसूर के मुंगलपुर गांव निवासी 27 साल के हंसराज गुर्जर 12 जून को जम्मू कश्मीर में गोली बारी में शहीद हो गए थे। परिवार में बुजुर्ग माता-पिता, पत्नी व 15 दिन को बेटा छोड़ गए। शहीद परिवार से जुड़े दयाराम गुर्जर ने बताया कि राज्य सरकार से अभी एक रुपया नहीं मिला है। अभी तक तो बैटल कैजुएलिटी रिपोर्ट तक नहीं भेजी गई है। पैकेज की बात तो दूर है।
सुकमा हमले में शहीद हुए लक्ष्मण ङ्क्षसह
छत्तीसगढ़ में सुकमा हमले में 13 मार्च को मुण्डावर के सुन्दबाड़ी गांव निवासी लक्ष्मण सिंह शहीद हो गए। परिवार में छोटे-छोटे बच्चे हैं। परिवार के लोगों ने बताया कि राज्य सरकार से कोई आर्थिक सहायता नहीं मिली है। केन्द्र व छत्तीसगढ़ की सहायता मिली है।
राजेन्द्र जम्मू में शहीद
दो फरवरी को कठूमर के मैथना निवासी 27 साल के राजेन्द्र सिह जम्मू कश्मीर के अनंतनाग सेक्टर में 2 फरवरी को शहीद हो गए थे। उनके भाई वीरेन्द्र ने बताया कि बैटल कैजुएलिटी प्रमाण पत्र मिल गया। लेकिन अभी तक राज्य सरकार की तुरंत सहायता का एक लाख रुपया भी नहीं मिला है। एक छोटा बेटा है। नौकरी मिलना तो आगे की बात है।





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