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राजस्थान रोडवेज के यहां 150 से ज्यादा कर्मचारी हड़ताल पर, 15 बसें अटकीं, चालकों से मारपीट खटकी

हिण्डौनसिटी.
रोडवेज कार्मिकों के विभिन्न संगठनों की ओर से तेरह सूत्री मांगों को लेकर चल रहे आंदोलन के तहत किए गए चक्काजाम का असर बसों के संचालन पर दिखा।

 

रोडवेज कार्मिकों के संयुक्त मोर्चा के दो दिन तक चक्काजाम के आह्वान पर आगार के करीब १५० कर्मचारी हड़ताल पर रहे। इससे विभिन्न शहरों में आगार की १५ बस अटक गई। जबकि तड़के जयपुर के लिए रवाना की गई दो बसों को आधे रास्ते से वापस लौटना पड़ा। हड़ताल से पहले ही दिन रोडवेज आगार को पांच लाख रुपए का घाटा झेलना पड़ा।

 

राजस्थान परिवहन निगम संयुक्त कर्मचारी फैडरेशन द्वारा बसों का संचालन सुचारू रखने की घोषणा के बावजूद संयुक्त मोर्चा की हड़ताल से विभिन्न रूटों पर ७५ बसों का संचालन ठप रहा। इससे यात्री परेशान हुए और मजबूरन उन्हें डग्गेमारी वाहनों का सहारा लेना पड़ा।
सूत्रों के अनुसार प्रदेश भर में जाम के हालातों को देखते हुए दिल्ली की छह, भरतपुर की १५, अलवर की १९ व जयपुर की ३५ बसों का संचालन नहीं हो पाया।

जबकि स्थानीय डिपो की जयपुर में सात, दौसा में दो, कोटा में एक, जोधपुर में एक, उदयपुर में एक व बयाना में तीन बसें अटक गई। जयपुर के लिए तड़के रवाना हुई दो बसों को हड़ताली कर्मचारियों ने सिकंदरा व समलेटी के पास रोक लिया और चालकों के साथ मारपीट कर दी। ऐसे में परिचालकों को यात्रियों को किराया वापिस करना पड़ा। हालांकि रोडवेज स्टेण्ड से महवा, करौली, कैलादेवी, भुसावर, टोडाभीम व गंगापुर के लिए कुछ बसों का संचालन किया गया।



बारिश में भी धरने पर बैठे रहे कर्मचारी
इधर रोडवेज बचाओ-रोजगार बचाओ आंदोलन के तहत आगार के मुख्य द्वार पर संयुक्त मोर्चा के तहत एटक, इंटक, सीटू, सेवानिवृत कर्मचारी एसोसिएशन कल्याण समिति व बीजेएमएस से सम्बद्व कर्मचारियों का धरना तीसरे दिन भी जारी रहा। दिनभर चले बारिश के दौर के बावजूद कर्मचारी धरने पर डटे रहे। एसोसिएशन के अध्यक्ष यादराम चौधरी व एटक के सचिव सत्यवीरसिंह डागुर ने बताया कि सरकार रोडवेज का बेड़ा गर्क करना चाहती है, लेकिन कर्मचारी इस मंशा को सफल नहीं होने देंगे।

 

हाजिरी कर धरने पर जा बैठे कर्मचारी
कुछ कर्मचारियों ने पहले तो आगार कार्यालय में हाजिरी कर खुद को हड़ताल से बाहर बता दिया। लेकिन बाद में धरना स्थल पर बैठ हड़तालियों में शामिल हो गए। आगार मुख्य प्रबंधक बहादुरसिंह गुर्जर ने धरने पर बैठे कर्मचारियों की वीडियोग्राफी कराई तथा दोहरी भूमिका निभा रहे कर्मचारियों की हाजिरी रजिस्टर में गैर हाजिरी लगा दी।

 

लम्बी दूरी की बसों का नहीं हो सका संचालन
लम्बी दूरी की बसों का संचालन नहीं हो सका। जबकि क्षेत्रीय मार्गों पर बसों का संचालन यथावत रहा। हड़ताल से करीब पांच लाख रुपए के राजस्व का नुकसान हुआ है। कई बसें भी विभिन्न रुटों पर अटकी हुई है। — बहादुरसिंह गुर्जर, आगार मुख्य प्रबंधक, हिण्डौनसिटी
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