उदयपुर। 27 जुलाई को होने वाला पूर्ण चंद्र ग्रहण अपने आप में अद्भुत तो होगा ही, साथ ही यह इस सदी का सबसे लंबा चंद्र ग्रहण भी होगा। इस दौरान विभिन्न प्रेक्षणों के जरिये पृथ्वी पर प्रदूषण के स्तर का आकलन किया जाएगा।
इस खगोलीय घटना का वैज्ञानिक अध्ययन बीएन यूनिवर्सिटी के भौतिक शास्त्र विभाग के प्रो. एसएनए जाफरी तथा असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. देवेंद्र पारीक तथा स्नातकोत्तर विद्यार्थी प्रांजल जोशी, पंकेश भाटी, कमलेश, श्रेयांश व्यास, कुशाग्र नागर, ऋषि रावल करेंगे।
जाफरी ने बताया कि इस खगोलीय घटना के वैज्ञानिक अध्ययन के लिए 103 मिनट महत्वपूर्ण होंगे क्योंकि ये पूर्ण चंद्र ग्रहण की अवधि है। इसमें सिंटीलेशन, गाइगर मूलर संसूचक से 600 और 1400 केईवी (किलो इलेक्ट्रॉन वॉल्ट)ऊर्जा के द्वितीयक अंतरिक्ष विकिरणों के प्रेक्षण लिए जाएंगे।
यह अध्ययन 21 जुलाई से 1 अगस्त तक किया जाएगा। इस खगोलीय घटना से पिछले चंद्रग्रहण से प्राप्त आंकड़ों का सत्यापन किया जाएगा, जैसे चंद्रमा का रंग लाल खून सा होना।
एेसा सूर्य की किरणों का पृथ्वी के वायुमंडल से प्रकीर्णन के जरिये होता है। कभी-कभी चंद्र ग्रहण के समय काले धब्बों का दिखाई देना, पृथ्वी के वायुमंडल में अधिक प्रदूषण को दर्शाता है।
इस सदी के ये रहे लंबा चंद्र ग्रहण
इससे पहले सदी का सबसे लंबा चंद्रग्रहण जून 2011 और 16 जुलाई, 2000 को हुआ था। जून 2011 में पूर्ण चंद्रग्रहण 100 मिनट तक देखा गया था। उस दौरान साफ आसमान होने पर भारत सहित दुनियाभर के देशों के लोग आकाश की इस अद्भुत खगोलीय घटना के साक्षी बनेंगे।16 जुलाई, 2000 को पूर्ण चंद्रग्रहण 1 घंटा 46 मिनट का था।





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