गिरीश व्यास @ रेलमगरा (राजसमंद)
सरकारी विद्यालयों में अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों के लिए राज्य सरकार द्वारा कई योजनाओं का संचालन तो किया जा रहा है लेकिन बालकों के भविष्य के लिए व्यवस्थाओं को पूरी तरह से नजर अंदाज किया जा रहा है। रेलमगरा पंचायत समिति क्षेत्र के दो ऐसे अलग-अलग मामले सामने आए हैं जिनमें से एक विद्यालय में पढऩे के लिए बालकों की भीड़ लगी हुई है लेकिन पढ़ाने के लिए कोई शिक्षक नहीं है, दूसरे विद्यालय में एक बालक को पढ़ाने के लिए तीन शिक्षक लगे हंै। स्थानीय पंचाायत समिति क्षेत्र के बामनिया कलां गांव के राजकीय प्राथमिक विद्यालय को पूर्व में उच्च माध्यमिक विद्यालय में समायोजित कर दिया गया। जिससे यहां कक्षा एक से 12 तक की कक्षाओं का अध्ययन शुरू हो गया। यहां एक से पांच तक की कक्षाओं में अध्ययन करने के लिए गत वर्ष कुल 5 विद्यार्थी थे, जिनमें से 4 विद्यार्थी तो कक्षा 5 में एवं एक विद्यार्थी कक्षा 3 में अध्ययनरत था। ऐसे में पांचवी कक्षा के चारों विद्यार्थी उत्तीर्ण होकर आगामी कक्षा में चले गए और तीसरी में अध्ययनरत छात्र उत्तीर्ण होकर चौथी कक्षा में आ गया। ऐसी स्थिति में कक्षा एक से पांच तक की कक्षाओं में चौथी कक्षा का यही एक मात्र छात्र रह गया। जिसे अध्ययन कराने के लिए प्राथमिक स्तर के कुल 3 शिक्षक विद्यालय में नियुक्त है। दूसरी ओर पंचायत समिति क्षेत्र के गिलूण्ड कस्बे के इंद्रा कॉलोनी में संचालित प्राथमिक विद्यालय शिक्षकों के लिए तरस रहा है। यहां पहली से पांचवीं तक की कक्षाओं में 25 से अधिक प्रवेश हो गए हैं लेकिन इनको पढ़ाने के लिए वर्तमान में एक भी शिक्षक मौजूद नहीं है। जानकारी में आया है कि यहां पूर्व में नियुक्त एकमात्र अध्यापिका का स्थानान्तरण अन्यत्र कर दिया गया, जिससे यहां शिक्षकों के सभी पद रिक्त हो गए। वर्तमान में विद्यालयों में प्रवेशोत्सव कार्यक्रम चल रहा है इस स्थिति में विद्यालय क्षेत्र के पीओ ने मौखिक आदेश जारीकर पंचायत क्षेत्र के मालीखेड़ा से दो दिन पूर्व बाबूलाल बलाई को शिक्षण व्यवस्थार्थ यहां प्रतिनियुक्ति पर नियुक्त किया। इस शिक्षक ने एक यहां सेवाएं दी और दूसरे ही दिन मालीखेड़ा विद्यालय में कार्यरत शिक्षिका के अवकाश में चले जाने से उसका पद स्थापन यहां से निरस्त कर उसे पुन: मालीखेड़ा भेज दिया गया और टीला खेड़ा के अन्य शिक्षक बद्रीलाल गायरी को मौखिक रूप से आदेश देकर यहां सेवाएं देने के लिए कह दिया गया। पत्रिका पड़ताल में सामने आया कि एक विद्यालय से दूसरे विद्यालय में शिक्षकों को दौड़ाने के लिए कोई लिखित आदेश भी जारी नहीं किए गए वहीं दूरभाष पर बात करके ही पीओ ने भिन्न विद्यालयों में सेवाएं देने के आदेश जारी कर दिए। यहां प्रवेश के बाद शिक्षण के लिए बालकों के पहुंचने का क्रम तो शुरू हो गया लेकिन इनकों पढ़ाने के लिए एक भी शिक्षक उपस्थित नहीं है।
पूर्व में कार्यरत शिक्षिका का स्थानान्तरण हो गया था लेकिन एक ही शिक्षिका होने से उसे रिलिव नहीं किया गया। स्वास्थ्य खराब होने से वह अवकाश में हैं। शिक्षण व्यवस्थार्थ आसपास के विद्यालयों को यहां सेवाएं देने के लिए मौखिक रूप से कहा गया है। अब लिखित में आदेश जारी कर दिए जाएंगे।
सुमन तोगडिय़ा, पीओ, राआउमा विद्यालय गिलूण्ड
पांचवीं कक्षा में चार बच्चे थे, जो उत्तीर्ण होकर छठी कक्षा में चले गए, इसलिए चौथी कक्षा में एक ही बालक रह गया। वर्तमान में प्रवेश प्रक्रिया जारी है और भी बालकों के प्रवेश हो जाएंगे। विद्यालय में प्राथमिक शिक्षा स्तर के लिए तीन अध्यापक नियुक्त है।
रामगोपाल दीक्षित, पीओ, राउमावि बामनिया कलां





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