जयपुर। राजस्थान के रेतीले टीलों में हजारों कहानियां दफन हैं। जिनको सुनकर हर कोई हैरान रह जाता है। ऐसी ही एक कहानी है जैसलमेर के करणाराम की। दुनिया में करणाराम के नाम दुनिया की दूसरी सबसे लंबी मूंछें रखने का गिनीज बुक ऑफ वल्र्ड रिकॉर्ड भी दर्ज है। करणाराम भील की ये कहानी करीब 30 साल पुरानी है। सोनार का किला आज की ही तरह पहले भी हर वक्त अपनी स्वर्णिम आभा बिखेर रहा था। इसी किले में रहता था मशहूर नड़ वादक करणाराम। उस वक्त वह इस किले की शान था।
हालांकि आज उसी किले के पास रेत के टीलों के बीच करणाराम की कब्र मौजूद है। हिंदू होने के कारण करणाराम का दाह संस्कार किया जाना चाहिए था। बावजूद इसके 30 साल बाद भी उनका अंतिम संस्कार नहीं किया गया है।
दरअसल, 2 अक्टूबर 1988 को करणाराम अपनी ऊंटगाड़ी पर सवार होकर पशुओं के लिए चारा लेने के लिए घर से निकला। जिस वक्त वो सोनार के किले के पास से गुजर रहा था उसी वक्त कुछ लोगों ने उस पर हमला कर दिया। हमलावरों ने करणाराम की नृशंस हत्या कर दी। उन्होंने करणाराम के सिर को धड़ से अलग कर दिया। इसके बाद उन्होंने ऊंटगाड़ी पर करणाराम का धड़ रखा और उसे घर की ओर रवाना कर दिया। हमलावर करणाराम का कटा हुआ सिर अपने साथ ले गए। करणाराम का धड़ एयरफोर्स वाले घर तक पहुंचा तो हर कोई सन्न रह गया। करणाराम की मौत हो चुकी थी लेकिन परिवार के लोगों ने कटे सिर की तलाश शुरू की। उन्हें पता चला कि किले के पास ही उनकी हत्या की गई है।
अंतिम संस्कार के लिए परिवार ने पूरे किले के आसपास कटे सिर को खूब ढूंढा, लेकिन उनकी तलाश 30 सालों बाद भी पूरी नहीं हुई है। इसी के चलते आज भी करणाराम का धड़ अंतिम संस्कार का इंतजार कर रहा है।
रेतीले धोरों के बीच सिर की तलाश
करणाराम के परिवार के लोग बताते हैं कि उनका धड़ बिना सिर के दफन है। उनका मानना है कि करणाराम के हत्यारे उनका सिर काटकर सरहद के पार ले गए। बताया जाता है कि उस वक्त इंटेलीजेंस एजेंसियों ने भी रिपोर्ट दी थी कि करणाराम के सिर को काटने के बाद कातिल उसे पाकिस्तान लेकर चले गए। आज भी करणाराम का परिवार रेतीले धोरों के बीच करणाराम के शव को ढूंढता रहता है। उनका कहना है कि हो सकता है कि हत्यारों ने रेतीले टीलों के बीच कहीं पर उनका शव फेंक दिया हो। करणाराम को जानने वाले बताते हैं कि वो ऐसे शख्स थे जिसे मारना अकेले संभव नहीं था। वे अकेले ही ऊंट को उठा लेते थे। ऐसे में कोई उन्हें मार ही नहीं सकता था।
नड़ वादन के लिए थे मशहूर
करणाराम अपने नड़ वादन के लिए काफी मशहूर थे। हालांकि वे पैदाइशी कलाकार नहीं थे, बल्कि पूर्व में वे एक डकैत थे और रेगिस्तान में उनका खौफ पसरा रहता था। करणाराम की बड़ी-बड़ी मूंछें थीं जिन्हें देखकर अक्सर बच्चे डर जाया करते थे। कहते हैं कि ये वो दौर था जब अफगानिस्तान और पाकिस्तान में नड़ वादन काफी शौक से सुना जाता था। खासकर वहां की लड़कियां नड़ वादन की दीवानी थीं। उस वक्त डकैत करणाराम अफगानिस्तान की एक लडक़ी लाली को दिल दे बैठा था और उसी के लिए वो एक नड़ वादक बन गया।
जमीन विवाद में की थी हत्या
जैसलमेर और बाड़मेर के बीच 1965 में करणाराम ने जमीन खरीदी। हालांकि इस जमीन के मालिकाना हक को लेकर करणाराम का इलियास नामक शख्स से विवाद हो गया। ये विवाद इतना बढ़ा कि करणाराम ने गुस्से में इलियास को उसी के बेटे के सामने गोली मार दी। इलियास की मौत ने उसके बेटे को करणाराम का दुश्मन बना दिया। करणाराम को गिरफ्तार कर उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई। लोग बताते हैं कि करणाराम को जेल की जिंदगी रास नहीं आई और वह जेल से फरार हो गया। करणाराम को दोबारा पकड़ लिया गया।
नड़ वादन से ज्ञानी जैलसिंह भी हुए प्रभावित
उस वक्त करणाराम जैसलमेर में होने वाले हर एक लोकसंगीत के कार्यक्रम की शान समझा जाता था। जैसलमेर के किले में होने वाले वीवीआईपी कार्यक्रम उसके नड़ वादन के बिना संपन्न नहीं होते थे। इसके चलते उन्हें पेरोल मिल जाती थी। तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी जैलसिंह जब जैसलमेर आए तो करणाराम पेरौल पर जेल से बाहर थे। उन्हें नड़ वादन के लिए बुलाया गया। लोग बताते हैं कि उनके नड़ वादन से जैलसिंह काफी प्रभावित हुए और उन्होंने करणाराम की सजा कम कर दी थी।
धड़ हिन्दुस्तान में, सिर पाकिस्तान में!
करणाराम का कटा सिर कहां है ये 29 साल बाद भी एक राज ही है। साथ ही ये भी नहीं पता चल सका है कि उनका सिर हिंदुस्तान में है या पाकिस्तान में। पुलिस ने केस की फाइल बंद कर दी है और अब इस बात की उम्मीद बहुत कम ही है कि इस राज पर से पर्दा उस सकेगा।





No comments:
Post a Comment