झुंझुनूं. टूटी सड़कें, दुर्गंध देते शौचालय, चारों तरफ गंदगी का अंबार। कुछ ऐसा ही नजारा है झुंझुनूं के रोडवेज बस स्टैण्ड का। करीब 36 वर्ष पहले बने इस स्टैंड पर सुविधाओं का कोई विस्तार नहीं हो पाया है। यात्री कुछ क्षण भी यहां आराम के नहीं गुजार सकता। बरसात के मौसम में तो हाल ज्यादा खराब हैं। टुटी सड़कों पर बने गड्ढ़ों से हर समय बस के टायर कीचड़ उछालते रहते हैं।
कई बार यात्रियों के कपड़े भी खराब हो जाते हैं। इस रोडवेज बस स्टैण्ड का निर्माण वर्ष 1980 में हुआ था। दो वर्ष बाद विधिवत रूप से गाडिय़ों का संचालन शुरू कर दिया गया। पिछले कुछ वर्षों में यात्री भार को देखते हुए गाडिय़ों की संख्या में इजाफा किया। लेकिन बस स्टैण्ड की सुख-सुविधाएं बढ़ाने को लेकर रोडवेज प्रशासन की ओर से कोई ध्यान नहीं दिया गया। हालांकि कुछ अधिकारियों ने इसके लिए प्रयास किए, लेकिन वो नाकाफी साबित हुए हैं।
टूटी सड़कें, कचरे के अंबार
हालत यह है कि बस स्टैण्ड पर सड़कें क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। मरम्मत नहीं होने के कारण बड़े-बड़े गढ्डें हो चुके हैं। इसके अलावा साफ-सफाई की व्यवस्था नहीं होने के कारण चारों तरफ कचरे के ढेर लगे हुए हैं। स्टैण्ड़ पर यात्रियों के लिए बैठने के लिए कुर्सियों भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं हैं। ऐसे में गाडिय़ों के लिए खड़े रहकर इंतजार करना पड़ता है।
बारिश लाती है आफत
रोडवेज कर्मियों ने बताया कि छत पर जाने के लिए शौचालय में लोहे की अस्थाई सीढिय़ां बनाई हुई है।लेकिन रास्ता सकरा होने के कारण चढऩा मुश्किल है। बारिश के दिनों में छत पर पानी इकठ्ठा होने से निकासी नहीं होने से दीवारों से चूने लगता है। दीवारें पोली होने के कारण कई जगहों से चूना गिरने लग गया है। ऐसे में हादसे की संभावना के कारण कार्मिक डर के साये में काम करते हैं।
कुल 99 बसें है बेड़े में
झुंझुनूं आगार के रोडवेज बेड़े में फिलहाल 99 बसें शामिल हैं। इनमें 75 रोडवेज की, 18 अनुबंधित और छह गाडिय़ां ऑफ रोड है। लेकिन कई इनमें से भी कई गाडिय़ों के हाल खराब है, जो कि जुगाड़ के भरोसे चल रही हैं। वहीं 26 साल का वक्त गुजरने के बावजूद उदयपुर, डूंगरपुर, बीकानेर व बांसवाड़ा जाने के लिए सीधा साधन नहीं है।
समय सारणी भी खराब
बस स्टैण्ड़ पर आने वाले यात्रियों को गाडिय़ों के बारे में जानकारी मिलती रहे, इसके लिए निजी कम्पनी की ओर से समय-सारणी की स्क्रीन लगाई गई थी।कुछ दिनों तक तो ठीक रही बाद में खराब हो गई।
महिला विश्राम गृह भी ताला
कुछ माह पूर्व विधायक कोटे से महिलाओं के लिए बस स्टैण्ड पर विश्राम गृह बनाया गया था।उद्घाटन के कुछ दिनों बाद से उसपर भी ताला लग गया है।ऐसे में निर्माण का उद्देश्य पूरा नहीं हो पाया है।
इनका कहना है...
रोडवेज जनसेवा से जुड़ी हुई है, वित्तिय शक्तियां प्रशासन ने समाप्त कर दी है। बस स्टैण्ड पर महिलाओं के लिए एसी शौचालय बनाने के अलावा जनसहयोग से तीन पंखे लगाना प्रस्तावित है। सुविधाएं बढ़ाने के लिए दानदाताओं से सहयोग लिया जाएगा।
वासुदेव शर्मा, आगार प्रबंधक झुंझुनूं।





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