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छात्रसंघ चुनाव की आहट होते ही तेज हुई राजनीतिक सरगर्मियां, 3 दिन से जारी है राजस्थान में यहां छात्रों का अनशन

आसींद/भीलवाड़ा। प्रदेश में छात्रसंघ चुनाव की सुगबुगाहट है। ऐसे में विभिन्न छात्र संगठनों की ओर से चुनाव जीतने के प्रयास के लिए कदम उठने शुरू हो गए हैं। इसी कड़ी में आसीन्द उपखंड मुख्यालय पर राजकीय महाविद्यालय के बाहर अपनी विभिन्न मांगों को लेकर शनिवार को एबीवीपी के नेतृत्व में छात्रों का आंदोलन तीसरे दिन भी जारी रहा। छात्र संगठन के पदाधिकारी तीसरे दिन भी भूख हड़ताल पर बैठे। उप जिला प्रमुख रामचंद्र सेन व जनप्रतिधियों ने तीसरे दिन छात्रों से बातचीत की तथा समझाइश के प्रयास किए। छात्र अपनी मांगों को लेकर अड़े हुए हैं। छात्रों की प्रमुख मांगों में महाविद्यालय के नए भवन में अध्ययन शुरू करवाया जाना है। इसके अतिरिक्त महाविद्यालय के रिक्त पदों को भरना और सीटें बढ़ाना भी उनकी मांगों में शामिल है।

 

वहीं अब छात्रों के साथ ही छात्राओं में भी राजनीति में आने का ट्रेंड दिनों-दिन बढ़ता जा रहा है। अब गल्र्स भी राजनीति के क्षेत्र में अपना वर्चस्व बढ़ाने व अन्य छात्राओं में अपनी अलग पहचान बनाने के लिए राजनीति में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही हैं।

 

अजमेर के छात्रसंघ चुनाव में गल्र्स भी अपनी पार्टी को जिताने का हरसंभव प्रयास करती नजर आ रही हैं। इसके लिए खासतौर पर सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर अपने पेज व ग्रुप बनाकर अन्य छात्राओं को इन गु्रप्स में शामिल कर उनकी समस्याएं जानने की कोशिश कर रही हैं। इसके साथ ही व्हाट्सएप पर गु्रप बनाकर गल्र्स को बल्क मैसेज भेजकर छात्राओं को खुद से रूबरू कराने के साथ ही न्यू एडमिशन गल्र्स से मिलकर उनकी समस्याओं का समाधान करती नजर आ रही हैं।


गल्र्स नेता यूं दिखा रही कॉलेज में टशन

गल्र्स नेता कॉलेज परिसर में कई साथी छात्राओं के साथ मिलकर टशन दिखाती नजर आ रही हैं। इसके तहत एक ही गॉगल, स्टाइलिश घड़ी, एक ही कलर के कपड़े, गले में दुप्पटा, माथे पर तिलक आदि लगा कर अन्य छात्राओं को अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश कर रही हैं। इसके साथ ही कॉलेज की केन्टिन व कॉलेज परिसर के आस-पास एकत्रित होकर रणनीति बनाती नजर आ रही हैं।

 

स्टूडेंट्स के हित में करना चाहती हैं काम

राजकीय कन्या महाविद्यालय की बीए फाइनल की स्टूडेंट रानू वर्मा ने बताया कि गल्र्स भी कॉलेज राजनीति में ना केवल हिस्सा ले रही हैं बल्कि अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाकर स्टूडेंट्स के हित में काम करना चाहती हैं। कॉलेज में गल्र्स की कई ऐसी समस्याएं हैं उन्हें दूर करने के लिए किसी ओहदे पर होना आवश्यक है अन्यथा सुनवाई आमतौर पर नहीं होती है।

 

कॉलेज तक सिमटी छात्राओं की राजनीति

2013-14 में सावित्री कॉलेज की अध्यक्ष रही श्वेता आर्य ने बताया कि अधिकतर छात्राएं केवल कॉलेज तक ही राजनीति कर पाती हैं। इसके बाद पारिवार का पूर्ण सहयोग नहीं मिल पाने व विवाह बंधन में बंधने के बाद छात्राएं राजनीति के क्षेत्र में आगे नहीं बढ़ पाती हैं। इसके साथ ही गल्र्स के लिए सामाजिक परिवेश ऐसा है कि आज भी महिलाओं को अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते ना चाहते हुए भी मुंह मोडऩा पड़ता है।

 

बदला गल्र्स के बीच पहचान बदलने का तरीका

बीए फाइनल की छात्रा सावी जोशी ने बताया कि बॉयज के समान हम गल्र्स भी अपनी टेक्नो एक्सपर्ट की टीम के साथ मिलकर काम करके कॉलेज के नए सैशन शुरू होते ही जूनियर स्टूडेंट्स से अपनी पर्सनल वेबसाइट,पेम्पलेट, विजिटिंग कार्ड आदि के माध्यम से सम्पर्क करना शुरू कर देते हैं। साथ ही फॉर्म जमा करने से लेकर क्लास में एडमिशन तक किसी भी तरह की परेशानी को हल करने की कोशिश कर उन छात्राओं में अपनी पहचान बनाते हैं।



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