नई दिल्ली। असम में भाजपा सरकार द्वारा नेशनल सिटिजन रजिस्टर (एनआरसी) लागू करने के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जोरदार हमला बोला है। उन्होंने इस मुद्दे पर जारी त्वरित प्रतिक्रिया में कहा है कि यह 40 लाख लोगों को नागरिकता से बेदखल करने जैसा कदम हैं। उन्होंने बताया है कि एनआरसी को एक सोची समझी चाल के तहत लागू किया गया है। ताकि एक खास समुदाय के लोगों को असम से बाहर भेजना संभव हो सके।
आधार और पासपोर्ट वाले भी एनआरसी से बाहर
सीएम ममता ने कहा कि एनआरसी को जिस तरह से लागू किया गया है उससे साफ झलकता है कि यह व्यवस्था भेदभाववाला है। उन्होंने कहा काफी संख्या में ऐसे लोग हैं जिनके बाद आधार कार्ड और पासपोर्ट है लेकिन उनका नाम एनआरसी ड्राफ्ट सूची में नहीं हैं। उपनामों या सरनैम के आधार पर लाखों लोगों के नमा हटा दिए गए हैं। उन्होंने भाजपा सरकार से सवाल भरे लहजे में पूछा है कि क्या यह सरकार की तरफ से नागरिकता से बलपूर्वक बेदखल करने की कोशिश नहीं है ?
सूची का आधार SC की गाइडलाइंस
असर सरकार का दावा है कि एनआरसी में जिन लोगों के नाम आए हैं वो पूरी तरह पुख्ता मूल दस्तावेजों के आधार पर आए हैं। एनआरसी के राज्य समन्वयक प्रतीक हाजेला का कहना है कि हमने सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइंस पर काम कर वांछित दस्तावेजों के आधार पर ही लिस्ट तैयार की है। इसमें कहीं भी अनियमितता की गुंजाइश नहीं है लेकिन इसमें गड़बड़ियों के आरोप लगातार सामने आए हैं। बहुत से सही लोगों के नाम भी इस सूची से गायब हैं। आपको बता दें कि नागरिकता के लिए आधार वर्ष 25 मार्च, 1971 हैं। इस डेट लाइन को आधार बनाते हुए एनआरसी में सभी भारतीय नागरिकों के नाम, पते और फोटोग्राफ शामिल किए गए हैं। पहला ड्राफ्ट जारी होने के बाद कुछ लोगों से अपना नाम शामिल न होने पर असंतोष जाहिर किया था। जिसके बाद असम सरकार ने दूसरा ड्राफ्ट जारी करने का निर्णय लिया।





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