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बैडमिंटन: उत्तराखंड के लक्ष्य सेन ने 53 साल बाद देश को दिलाया सोना, सिंधु को पीछे छोड़ रचा इतिहास

नई दिल्ली। भारत के युवा बैडमिंटन खिलाड़ी लक्ष्य सेन ने इंडोनेशिया के जकार्ता में एशियाई जूनियर बैडमिंटन चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीत कर इतिहास रच दिया है। लक्ष्य की जीत इस मायने में खास है कि उन्होंने 53 साल बाद भारत को इस प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक दिलाया। बता दें कि इससे पहले 1965 में भारत के गौतम ठक्कर ने स्वर्ण पदक जीतने में कामयाबी हासिल की थी। मूलत: उत्तराखंड के रहने वाले लक्ष्य की जीत पर बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने ट्वीट करते हुए उन्हें बधाई दी है।

टॉप सीड धारी खिलाड़ी को हराया-
इस टूर्नामेंट में लक्ष्य को छठी सीड मिली थी। फाइनल में उनका मुकाबाल टॉप सीड धारी थाईलैंड के कुनलावुत वितिदसरन से था। मुकाबले से पहले कुनलावुत को जीत का प्रबल दावेदार माना जा रहा था। लेकिन लक्ष्य ने बेहतीरन प्रदर्शन करते हुए कुनलावुत को सीधे सेटों में हरा दिया। आज खेले गए फाइनल मैच में लक्ष्य ने कुनलावुत को 21-19, 21-18 से शिकस्त दी। लक्ष्य ने क्वार्टर फाइनल में दूसरी सीड ली शीफेंग को मात दी थी और फाइनल में उन्होंने शीर्ष वरीय खिलाड़ी को 46 मिनट में हरा दिया।

 

इन दिग्गजों की फेहरिस्त में लक्ष्य-
प्रतिभावान खिलाड़ी लक्ष्य इसी के साथ ही इस प्रतियोगिता में पदक जीतने वाले भारतीय खिलाडियों गौतम ठक्कर (स्वर्ण-1965), प्रणव चोपड़ा/प्राजक्ता सावंत (कांस्य-2009), समीर वर्मा (रजत-2011) और पी.वी. सिंधू (कांस्य-2011) और (स्वर्ण-2012), समीर वर्मा (कांस्य)2012 की श्रेणी में शामिल हो गए। बता दें कि स्वर्ण पदक जीतने के साथ ही लक्ष्य ने भारतीय स्टार बैडमिंटन प्लेयर पी.वी. सिंधु को पीछे छोड़ दिया। सिंधु इस टूर्नामेंट में कांस्य ही जीत सकी थी।

पहले कांस्य पर कर चुके थे कब्जा-
लक्ष्य ने इससे पहले उन्होंने एशियाई जूनियर चैम्पियनशिप में कांस्य पदक जीता था। भारतीय खिलाड़ी मौजूदा विश्व रैंकिंग में 76वें और थाई खिलाड़ी 188वें स्थान पर हैं। दोनों के बीच मुकाबला काफी नजदीकी रहा और भारतीय खिलाड़ी ने निर्णायक मौकों पर धैर्य दिखाते हुए अंक निकाले और खिताबी जीत अपने नाम की।

 



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