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58 बच्चों के साथ इस स्कुल में सोमवार के दिन आखिर क्या हुआ कि उनके परिजन और शिक्षक दौड़ते-भागते पहुंचे

राजसमंद. पुनावली स्कूल में बच्चों ने सुबह साढ़े आठ बजे दूध गटका था। दोपहर ११.४० बजे तक मिड-डे-मील के तहत वितरित भोजन में दाल-चावल और रोटी खाई। पांचवें कालांश में कक्षा एक से नौ के बच्चों ने जी घबराने की शिकायत की। उन्हें उल्टियां शुरूहो गईं।
बच्चों के बीमार होते ही विद्यालय से १०८ व अन्य एंबुलेंस को फोन किया गया, लेकिन प्रदेशव्यापी आपातकालीन चिकित्सा उपलब्ध कराने वाले इस नम्बर पर किसी के फोन नहीं उठाने पर शिक्षकों व ग्रामीणों ने निजी स्तर पर वाहनों की व्यवस्था कर बच्चों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया। बीमार बच्चों को निजी गाडिय़ों से लेकर दौड़ते-भागते ज्योंही अस्पताल पहुंचे, वहां गहमागहमी का माहौल बन गया। बच्चों को लाने से पहले ही अतिरिक्त चिकित्सक और नर्सिंग स्टॉफबुला लिया गया था। बच्चों को दो वार्डों में भर्ती करते ही उपचार शुरू कर दिया गया।

बार-बार की उल्टियां
कई बच्चे स्कूल से लेकर अस्पताल पहुंने तक उल्टियां कर रहे थे। बच्चों के कपड़े, उन्हें उठाने वाले परिजन-ग्रामीणों, अस्पताल में बिस्तर सभी गंदे हो गए। शुरुआत में ५३ बच्चे लाए गए। बाद में पांच और बच्चों को घरों से निकालकर लाया गया। आधे बच्चे अचेतावस्था में आए। उपचार के बाद उनकी हालत में सुधार हुआ। प्रधानाचार्य-शिक्षक, परिजन व ग्रामीण सभी बच्चों की सार-संभाल में लगे रहे। अस्पताल के बाहर बड़ी संख्या में लोग एकत्र हो गए। बच्चों की चिंता में पूरे गांव के लोग भी आ गए। करीब दो घंटे तक बच्चों को लाने का क्रम जारी रहा।

ये बच्चे हुए बीमार
अर्जुन गमेती, भंवरलाल, निहारिका, पूरण, खुशबू, मांगीलाल, सुगना, प्रभु, कुसुम, ललित, किशन, पुष्पेन्द्र, गुलशन सिंह, ममता, जयसिंह, प्रतिज्ञा, अभयसिंह, रणवीर सिंह, किरण कुंवर, इन्दुनाथ, पूजा, सूरज, इन्दु गमेती, मनीष, दीपिका, भावना, निर्मल, हितेश, छगन, सुगना, खुशी, सुनीता, टीना, प्रेम, राहुल, हंसा कंवर, मनीषा, हेमलता, प्रवीण, पायल, प्रियंका, मधु, लक्ष्मी, लवीना, मोनिका, तारा, नन्दु कंवर, महेन्द्र, तख्त सिंह, गणेश, रेखा, धर्मेन्द्र।

सहमे बच्चे भाग छूटे घर, ढूंढकर लाना पड़ा अस्पताल
स्कूल में तबीयत खराब होने से सहमे कई बच्चे दौडक़र घर चले गए। उन्होंने परिजनों को स्थिति बताई, तो वे चिंतित हो उठे। एक-डेढ़ घंटे तक बच्चे घरों में ही उल्टियां करते रहे। कइयों को दस्त लग गए। एकबारगी अभिभावकों को समझ में नहीं आया कि आखिर उन्हें हुआ क्या? धीरे-धीरे सूचना फैलती गई, तो उन्हें माजरा समझ में आया। कई बच्चों को अस्पताल में भर्तीकराने के बाद सरकारी एम्बुलेंस से उन्हें ढूंढ-ढूंढकर घरों से बाहर निकाला तथा अस्पताल लाकर भर्तीकरवाया।

मासूमों की हालत देख रो पड़े परिजन
कई बच्चों ने बीमार पड़ते ही बोलना बंद कर दिया। कुछ रोने लगे। उनकी यह हालत देख माता-पिता रो पड़े। तीन साल की मोनिका को अस्पताल में बार-बार देखकर परिजन आंसू बहा रहे थे। कई बच्चों के परिजन सूचना मिलने पर सीधे अस्पताल पहुंचे। बच्चों की हालत में सुधार होने पर सभी की सांस में सांस आई।

दूधवाला भी शक के घेरे में
बताया कि प्रतिदिन दूध लाला भाई, उपेंद्र श्रीमाली व हेमंत श्रीमाली के घर से रामावि पुनावली में दूध की आपूर्ति की गई। नए दूधिये के घर से 14 लीटर दूध लाया गया। दूध की गुणवत्ता को लेकर दूधिये की भूमिका संदेह के दायरे में आ गई है। दूध के नमूने की जांच के बाद ही जांच की कार्रवाई आगे बढ़ पाएगी।

77 बच्चों ने पीया था दूध
पहली से आठवीं तक के 77 छात्र छात्राओं ने दूध पीया। पहली कक्षा में 6, दूसरी में 5, तीसरी में 10, चौथी कक्षा में 9, पांचवीं में 5, कक्षा 6 के 14, कक्षा सात के 10 एवं कक्षा आठ के 18 छात्र-छात्राओं ने दूध पीया। इनमें से 58 छात्र जिला अस्पताल पहुंचे। बाकी का विद्यालय में ही चिकित्सा दल ने उपचार किया।

ग्रामीणों ने किया पोषाहार व्यवस्था का विरोध
जिला अस्पताल में एकत्र ग्रामीणों ने पुनावली विद्यालय में पोषाहार व्यवस्था का विरोध किया। उन्होंने कहा कि इसे बंद कर देना चाहिए। आए दिन बच्चे बीमार होने की घटनाएं सामने आ रही हैं।
किसी दिन कोईबड़ी घटना हो गईतो कौन जवाबदेह होगा? ग्रामीणों ने बताया कि विद्यालय विकास समिति के सदस्यों से भी इस मुद्दे पर जल्द बातचीत की जाएगी।

&आधी छुट्टी के बाद हमने खाना खाया। उसके बाद वापस पांचवें कालांश में अचानक जी घबराया और उल्टी होने लग गई।
नानालाल सालवी, पांचवीं का छात्र
&मैंने खाना नहीं खाया, स्कू़ल में दूध पीया। कुछ समय बाद अचानक उल्टी होने लग गई। मनीष, कक्षा छह का छात्र
&मैंने स्कूल में ही दूध पीया था, जिसके बाद जी घबराया। मैं घर चली गई थी। घर पर ही उल्टी होने लग गई।
सुनीता, कक्षा छह की छात्रा
&मध्यान्तर में खाना खाया था। थोड़ी ही देर में सिरदर्द होने लगा और जी घबराया। उसके बाद मुझे अस्पताल ले गए।
भावना कुंवर, कक्षा तीन
दूध में हो सकती है मिलावट
&मैं काम पर गया था। मुझे फोन आया कि बच्ची बीमार हो गई है। बच्ची ने बताया कि उसने दूध पीया था। हो सकता है कि दूध में मिलावट की गई हो।
नानालाल, परिजन

&शुरुआत में कुछ बच्चों को नजदीकी आयुर्वेद चिकित्सालय ले गए। थोड़ी ही देर में बीमार बच्चों की संख्या बढ़ी तो १०८ एम्बुलेंस को फोन किया, लेकिन किसी ने फोन नहीं उठाया। फिर ग्रामीणों की मदद से निजी वाहनों से जिला चिकित्सालय पहुंचाया।
उदयलाल रेगर, प्रधानाचार्य, राजकीय माध्यमिक विद्यालय, पुनावली
हालत खतरे से बाहर
&खाद्य पदार्थों के नमूने लिए हैं। जांच में स्पष्ट हो पाएगा कि बीमार होने का कारण क्या था। फिलहाल सभी बच्चों की हालत खतरे से बाहर है।
राजेन्द्रप्रसाद अग्रवाल, उपखण्ड अधिकारी, राजसमंद



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