करौली.
डांग क्षेत्र की दौलतपुरा पंचायत के गांव चौरियाखाते में करीब तीन माह पहले जलसंग्रहण के लिए बनाई गई 5 पोखर पहली बारिश ही नहीं झेल पाई। जलभराव के बाद पोखरों के फूटने से किसानों की लाखों रुपए की धान की फसल नष्ट हो गई।
लाखों रुपए के हुए नुकसान के बाद अब किसानों के पास आंसू बहाने के सिवा कुछ नहीं बचा है। वहीं रोजी रोटी का संकट भी खड़ा हो गया है।
३०० बीघा भूमि पर खेती
ग्रामीणों ने बताया कि चौरियाखाते में इन 5 पोखरों के नीचे 300 बीघा से अधिक जमीन है, जिसमें धान की खेती होती है। एक बीघा भूमि पर धान उगाने में करीब पन्द्रह हजार से अठारह हजार रुपए का खर्चा आता है। धान की फसल नष्ट होने से किसानों को करीब पचास लाख रुपए का नुकसान हुआ है। इस साल अब धान की खेती नहीं हो सकेगी।
तीन दिन पहले भरी थी
क्षेत्र में करीब तीन दिन पहले हुई बारिश में पोखरों में पानी आया था। जिसके बाद किसानों को अच्छी खेती की उम्मीद जगी थी, लेकिन पोखर फूटने के बाद खेती को तो नुकसान हुआ ही वहीं पोखर के पानी का उपयोग भी नहीं हो सका। मुख्यमंत्री जलस्वावलम्बन अभियान के तहत इन पोखरों का निर्माण कराया गया था।
घटिया निर्माण का आरोप
ग्रामीणों ने दौलतपुरा सरपंच रामलखन मीना पर पोखर निर्माण में लापरवाही का आरोप लगाया है। किसानों ने बताया कि पोखरों का निर्माण कार्य नरेगा के तहत जेसीबी मशीन व ट्रैक्टरों से कराया गया था। मजदूरों को नहीं लगाने से गुणवत्तापूर्ण तरीके से निर्माण नहीं हो सका।घटिया निर्माण के चलते पोखर फूट गई, जिसका खमियाजा किसानों को भुगतना पड़ा है। पूर्व सरपंच गणपत डांगी, रमेश मीना, हरीमोहन मीना, प्रकाश मीना, होरी लाल मीना, रामस्वरूप मीना चौरियाखाते आदि ने पोखर निर्माण की फिर से जांच कराने की मांग की है। मुख्यमंत्री जलस्वावलम्बन अभियान के तहत इन पोखरों का निर्माण कराया गया था।





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