राजसमंद. जिला बाल कल्याण समिति की ओर से शहर में पीर बावजी स्थानक के पास एक होटल से सटे भवन से बरामद 6 7 नाबालिग किशोरियों को उनके घर भेजने की तैयारी की जा रही है। कथित परिजन और बालिकाएं इसके लिए राजी नहीं है। बालिकाएं यहीं रहकर आध्यात्मिक शिक्षा लेने पर अड़ी हैं। इधर, पुलिस और बाल कल्याण समिति अपनी-अपनी कार्रवाई में जुटी रही। पुलिस अलग से मामले की पड़ताल कर रही है, लेकिन अभी तक किसी नतीजे तक नहीं पहुंची है।
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शुक्रवार दोपहर तीन बजे जिला कलक्टर आनंदी और पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार ने बालिका गृह और होटल के पीछे संचालित स्कूल का निरीक्षण किया। किशोरियों के परिजन उनके अधिवक्ता अमोल कोकणे को लेकर कलक्टर से मिले और बाल कल्याण समिति की कार्रवाई को अनुचित बताते हुए सभी बच्चियों को उनके परिजनों को सौंपने की मांग की। कलक्टर ने उनकी बात सुनी और कहा कि कानूनी तौर पर बच्चियों को सम्बंधित जिलों की बाल कल्याण समिति के माध्यम से ही सौंपा जाएगा।
वकील बोले- स्कूल को संचालन के लिए इजाजत की जरूरत नहीं
बालिका गृह में बंद किशोरियों के परिजन सुबह दस बजे ही कलक्ट्रेट के सामने उद्यान में एकत्रित हो गए। अधिवक्ता अमोल व प्रजीत तिवारी ने बाल कल्याण समिति की कार्रवाई को अवैध बताते हुए आध्यात्मिक गौमुख समिति का विद्यालय बहाल करने की मांग रखी। उन्होंने कहा कि समिति पहले से सिरोही में पंजीकृत है और आध्यात्मिक गौमुख स्कूल संचालन के लिए उन्हें सरकार से अनुमति लेने की जरूरत नहीं है। सोसायटी फॉर प्राइवेट स्कूल राजस्थान व यूनियन ऑफ इंडिया व अन्य के (2012) 6 एससीसी 1 प्रकरण के आदेश का हवाला देते हुए अधिवक्ता अमोल ने बताया कि मदरसा, वैदिक पाठशाला राइट टू एज्युकेशन एक्ट के दायरे में नहीं है। यह आध्यात्मिक संस्था है, जहां धर्म व अध्यात्म की शिक्षा दी जाती है। इस पर कलक्टर ने कहा कि प्रकरण की बाल कल्याण समिति विस्तृत जांच कर रही है। जांच में जो भी सामने आएगा, उसी अनुसार अग्रिम कार्रवाईहोगी।
काउंसलरों के सामने भी मौन हैं किशोरियां!
बालिका गृह में रह रही किशोरियां डरी व सहमी हुई हैं। काउंसलरों से भी खुलकर बातें नहीं कर पा रही हैं। काउंसलर एक-एक बच्ची को उनकी इच्छा के मुताबिक परिजनों से भी बात करा रहे हैं। वे कुछ भी खुलकर बता नहीं पा रही हैं। जब कलक्टर पहुंचीं, तब कुछ किशोरियां दौडक़र कमरे में चली गई और कमरा बंद कर दिया। शिक्षिकाओं व काउंसलरों की समझाइश के बाद वे बाहर आईं। कई बच्चियां अपने निवास स्थल व परिजनों के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी दे पा रही हैं।
चॉकलेट की फोरेंसिक जांच
स्कूल में किशोरियों को एक-एक चॉकलेट रोजाना दी जाती है। इसकी किशोरियों ने गुरुवार और शुक्रवार को डिमांड की। बाल कल्याण समिति ने चॉकलेट का डिब्बा जब्त कर लिया और उसकी फोरेंसिक जांच कराने नमूने भेज दिए।
मांगी घर की सर्वेक्षण रिपोर्ट
हकीकत जानने के लिए प्रत्येक किशोरी के घर की सामाजिक सर्वेक्षण रिपोर्ट के लिए राजस्थान के साथ ही हरियाणा, कर्नाटक, केरल, नई दिल्ली सहित आठ राज्यों की राज्य सरकारों के साथ नेपाल सरकार को भी सीडब्ल्यूसी ने पत्र भेजा है। नेपाल की 9 किशोरियों को नेपाल दूतावास के माध्यम से नेपाल भेजा जाएगा। वहां से परिजनों को सौंपी जाएगी।





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