राजसमंद. शहर में पीर बावजी स्थानक के पास होटल के पीछे भवन में बाल कल्याण समिति द्वारा पुलिस के सहयोग से रेस्क्यू कर 67 बच्चियों को पन्नाधाय बालिका गृह में शिफ्ट करने की कार्रवाई पर अब सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि अगर संस्था गलत है, तो उस पर कार्रवाई क्यों नहीं की? बालिकाओं को क्यों बालिका गृह में रखा हुआ है? संबंधित जिला बाल कल्याण समितियों के माध्यम से रिलीज करने में देरी पर भी उंगली उठाई जा रही है। अभिभावकों और विश्व हिन्दू परिषद ने राज्य बाल संरक्षण आयोग अध्यक्ष मनन चतुर्वेदी के समक्ष ज्ञापन देकर इन सवालों पर बातचीत की। इधर, बाल कल्याण समिति सदस्य गजेंद्रसिंह ने कहा कि बालिकाओं को नियमित शिक्षा से जोडऩे के मुद्दे पर अभिभावक सिर्फ आध्यात्मिक स्कूल में इसी तरीके से रखना चाहते हैं। इस वजह से बच्चियों के सर्वोत्तम हित के मद्देनजर छोडऩा उचित नहीं है। बताया कि स्कूल में इन बच्चियों के लिए चॉकलेट्स व आयुर्वेद दवाइयां मिलीं। उनकी जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि माजरा क्या है।
कार्रवाई स्पष्ट कर बच्चियों को छोड़े
विश्व हिन्दू परिषद के जिला भगवतीलाल पालीवाल, प्रकाश जोशी, रमेश पालीवाल, लीलेश खत्री, अनिल जोशी, अशोक रांका, शैलेष चोरडिय़ा ने बाल संरक्षण आयोग अध्यक्ष मनन चतुर्वेदी को ज्ञापन देकर बालिका गृह से सभी बच्चियों को उनके परिजनों को सौंपने की मांग की। ज्ञापन में बताया कि सात दिन से जांच रही है, मगर अभी तक सारे विषय स्पष्ट नहीं किए। इससे पूरा हिन्दू समाज आहत है। क्योंकि जब माता पिता की सहमति से बच्चियां आध्यात्मिक शिक्षा ले रही है, तो क्या गलत है। अगर संस्था गलत है, तो उस पर सख्त कार्रवाई करें, मगर बच्चियों को जल्द से जल्द उनके अभिभावकों को सौंपा जाए। ताकि धार्मिक भावना आहत न हो।
बच्चियों का शोषण होने के आरोप
मुकेश कुमार दीक्षित, ज्योति जुगनू व सरिता ने कांकरोली थाने में बाल कल्याण समिति अध्यक्ष भावना पालीवाल, सदस्य गजेंद्रसिंह, आसरा विकास संस्था के भोजराजसिंह राठौड़ सहित अज्ञात काउंसलरों के खिलाफ रिपोर्ट दी। आरोप है कि बालिका गृह में बच्चियों को डरा, धमकाते हुए अश्लील बातें कर शारीरिक व मानसिक तौर से परेशान किया जा रहा है। एक ही तवे पर ७०-८० लोगों का खाना बन रहा है, तो करीब पचास लोगों के लिए सिर्फ 2 ही शौचालय है। आरोप है कि प्रजापिता ब्रह्माकुमारी संस्था से मिलीभगत कर आध्यात्मिक संस्था को बदनाम करने, तहस नहस करने का षड्यंत्र रचा जा रहा है। बाद में इसकी रिपोर्ट पुलिस अधीक्षक, जिला कलक्टर व बाल संरक्षण आयोग अध्यक्ष को भी दी गई। इसके अलावा 25 बच्चियों को उदयपुर शिफ्ट करने के दौरान बच्चियों के थप्पड़ मारने, घसीटने, सुइयां चुभोने, हाथ मरोडऩे, मारपीट कर, घसीटते हुए धक्के देकर बस में चढ़ाने के भी आरोप भी लगाए।
हर पहलू से जांच
बाल कल्याण समिति व पुलिस द्वारा जांच की जा रही है। प्रशासन से भी भौतिक रिपोर्ट लेंगे। बच्चियों का हित ही सर्वोत्तम रहेगा। उसी आधार पर कार्रवाई भी होगी। इसमें हर एक पहलू से जांच होगी, जिसमें अगर किसी ने भी बच्चियों के हित से खिलवाड़ किया है, तो जरूर कार्रवाई होगी।
मनन चतुर्वेदी, अध्यक्ष, राज्य बाल संरक्षण आयोग
बालिका गृह में सुविधा नहीं होने, बच्चियों के साथ कुछ गलत होने की बात कही। मैंने विधिक सेवा प्राधिकरण के मजिस्ट्रेट के समक्ष रिपोर्ट देने का सुझाव दिया। फिर व चले गए। बच्चियों से ज्यादाती व मारपीट के संबंध में कोई रिपोर्ट मेरे पास नहीं आई। आएगी तो प्रकरण दर्ज कर जांच की जाएगी।
गोविंदसिंह, थाना प्रभारी, कांकरोली
बालिका गृह में बच्चियों के साथ ज्यादती हो रही है। डरा, धमका व मारपीट से टॉर्चर किया जा रहा है। इसकी कांकरोली थाने के साथ एसपी, कलक्टर व बाल संरक्षण आयोग में भी रिपोर्ट दर्ज करवा दी।
अमोल कोकणे, अधिवक्ता, आध्यात्मिक गोमुख स्कूल





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