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जोहरा सहगल: क्रिकेट और पकौडे की शौकीन, 97 की उम्र में दिया ऐसा स्टेटमेंट, उड़ा दिए थे सबके होश

बॉलीवुड अभिनेत्री जोहरा सहगल ऐसी अभिनेत्री थीं जो 100 साल की उम्र में दिल से जवां थीं। उनका जन्म 27 अप्रेल 1912 को सहाहरनपुर के एक मुस्लिम परिवार में हुआ था। 10 जुलाई 2014 को 102 साल की उम्र में वह इस दुनिया को छोड़कर चली गई थीं।

एक अच्छी डांस कोरियोग्राफर भी थीं:
जोहरा सहगल ना केवल एक बेहतरीन अदाकारा थीं बल्कि एक अच्छी डांस कोरियोग्राफर भी थीं। उन्होंने बहुत सी फिल्मों में अभिनय की छाप छोड़ी है। वह आखिरी बार 2007 में संजय लीला भंसाली की फिल्म 'सांवरियां' में नजर आई थीं। वर्ष 2010 में उन्हें पद्म विभूषण से भीर सम्मानित किया गया।

8 साल छोटे हिंदू लड़के से रचाई शादी:
जोहरा सहगल ने उस समय भी समाज की परवाह ना करते हुए एक हिंदू लड़के से शादी की थी। उनके पति कामेश्वर नाथ सहगल उम्र में उनसे 8 साल छोटे थे। वह उदय शंकर के डांस ग्रुप में थे और भारत में इस एकेडमी के बंद होने तक इसमें शामिल रहे।

रोजाना बोला करती थीं 36—37 कविताएं:
जोहरा को कविताओं और शायरी का बहुत शौक था। वह रोज शाम को व्यायाम की तरह 36-37 कविताएं घर पर बोला करती थीं। उनका मानना था कि ऐसा करने से उनकी स्मरण शक्ति मजबूत रहती है।

जिंदादिली का राज:
वह काफी जिंदादिल महिला थी। एक बार उनसे पूछा गया कि 97 साल की उम्र में भी उनकी जिंदादिली का क्या राज है। इस पर उन्होंने कहा था कि ह्यूमर और सेक्स। उन्होंने कहा था 97 की उम्र में भी उनके लिए सेक्स बहुत जरूरी है।

 

जोहरा सहगल: क्रिकेट और पकौडे की शौकीन, 97 की उम्र में दिया ऐसा स्टेटमेंट, उड़ा दिए थे सबके होश

15 साल तक पृथ्वी थिएटर से जुड़ी रहीं:
जोहरा सहगल को डांस का बहुत शौक था। वह बंटवारे के बाद मुंबई आईं और
1945 में पृथ्वी थिएटर से जुड़ीं और क़रीब 15 साल तक जुड़ी रहीं। वह पृथ्वीराज कपूर को अपना गुरु मानती थीं।

बड़े चाव से देखती थीं क्रिकेट मैच:
ज़ोहरा सहगल को फिल्में देखने का इतना शौक नहीं था, जितना क्रिकेट देखने का था। वह क्रिकेट मैच वो बड़े चाव से देखा करती थीं। जब जोहरा की आंखें कमज़ोर हो गई तो उनकी बेटी किरण क्रिकेट के मैच के दौरान मैच का स्कोर लगातार ज़ोहरा को बताया करती थीं।

पकौडे की शौकीन:
जोहरा सहगल खाने की बड़ी शौकीन थीं। उनकी पसंदीदा चीज़ें में पकौड़े, कड़ी और मटन कोरमा शामिल थे। जब भी उनके घर पर कोई मेहमान आता तो वह पकौड़े बनाने को कहतीं और परोसे जाने पर मेहमानों से ज़्यादा खुद ही खा लिया करती थीं।

 



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