जयपुर।
चुनाव नजदीक आते ही भाजपा जनप्रतिनिधियों के बीच आरोप—प्रत्यारोप का दौर चरम पर है। इसमें विधायक और पार्षदों के बीच चल रहे विवाद की आंच में अब भाजपा जयपुर शहर अध्यक्ष व शहर जिला मंत्री का भी नाम जोड़ दिया गया है। ऐसे मामले में विधायक नरपत सिंह राजवी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर वार्ड 8 के पार्षद भगवत सिंह देवल पर खुलकर भ्रष्टाचार के आरोप लगा दिए हैं। इसमें भाजपा शहर अध्यक्ष संजय जैन और शहर जिला मंत्री हिम्मत सिंह की भी मिलीभगत होने का दावा किया गया है।
राजवी ने यहां तक लिख दिया कि निगम अधिकारियों और पार्षद की सांठगांठ से निर्मित—निर्माणाधीन इमारतों से वसूली की जा रही है। सफाई से लेकर अन्य ठेके भी मिलीभगत से ले लिए गए। उन्होंने इन सभी मामलों की जांच भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से कराने की मांग कर दी।यह पत्र 6 जुलाई को लिखा गया, लेकिन 10 दिन बाद भी इस मामले में कुछ हलचल नहीं हुई है। ऐसे में जांच के बाद ही साफ होगा कि पत्र में कितनी सच्चाई है। देवल अभी निगम की गैराज समिति के चेयरमेन हैं।
अवैध भवनों के सूची से वसूली!
राजवी ने लिखा है कि पार्षद देवल ने 23 फरवरी, 2018 को विद्याधर नगर जोन उपायुक्त को पत्र लिखा, जिसमें 23 भवन की सूची सौंपी। इन सभी को अवैध व्यावसायिक निर्माण बताया गया। देवल के पड़ौस में निगम के कनिष्ठ अभियंता धर्मसिंह सोनी रहते हैं। दोनों की मिलीभगत से वसूली का खेल चल रहा है। तभी 23 में से केवल 4 को नोटिस जारी हुआ। बाकी 19 लोगों को महापौर अशोक लाहोटी के हस्तक्षेप के बाद जारी कराया गया। उनका दावा है कि इनमें से कई तो आवासीय हैं। ऐसे में साफ है कि गलत नीयत से शिकायत की गई। इसकी जांच कराने के लिए कहा है।
शहर अध्यक्ष व मंत्री तक उछला मामला
देवल, शहर अध्यक्ष व मंत्री ने संयुक्त रूप से मिलकर 8 मेट्रो स्टेशन की पार्किंग का ठेका एक कंपनी के नाम लिया है। इसमें शहर मंत्री के रिश्तेदार का नाम भी अंकित है, जिसे संगठन के युवा मोर्चा में जगह दी गई है।
गुप्ता एण्ड कंपनी (विद्याधर नगर मण्डल अध्यक्ष की फर्म बताई जा रही) को नालों की सफाई का ठेका दिलाया गया। शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं तो महापौर से बात की। महापौर ने बताया कि जिला संगठन में शामिल होने के कारण कार्रवाई नहीं की जा सकी। इसी कंंपनी को कई वार्ड में काम मिला हुआ है।
महापौर ने खोली पोल
विधायक का दावा है कि उनके पूछने महापौर ने बताया कि बेमानी ठेके लेने वाले 10 महीने के बाद बिल प्रस्तुत करते हैं, ताकि बात ठंडी पड़ जाए। इससे जमा सिक्योरिटी राशि की समय सीमा निकल जाती है और गुपचुप तरीके से भुगतान बिल पास करा लिया जाता है।
इनका कहना है
संभव है विधायक को आगामी चुनाव में टिकिट नहीं मिल रहा हो, इसलिए हताश हैं। इसी कारण ऐसे आरोप लगाकर पार्टी की छवि खराब करने पर तूले हैं। उन्होंने पांच साल तक फील्ड में तो काम किया नहीं। आरोप कोई भी लगा सकता है, लेकिन इसे सिदृध नहीं किया जा सकता है।
भगवत सिंह देवल, पार्षद (चेयरमेन, गैराज समिति)
—सीएम को लिखे पत्र में भ्रष्टाचार को सिद्ध करते हुए दस्तावेज हैं। इसमें चुनाव के समय की तो कोई बात ही नहीं है। कार्रवाई सरकार को करनी है। अभी तक कार्रवाई हुई है या होने वाली है, इसकी जानकारी नहीं है।
नरपत सिंह राजवी, विधायक
—गलत आरोप लगाया गया है। उन्होंने ऐसा क्यों किया, ये वही बता सकते हैं। चाहे तो जांच करा लें, दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।
-संजय जैन, अध्यक्ष, भाजपा जयपुर शहर अध्यक्ष





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