पाली. सुरक्षित स्थान ढूंढने के चक्कर में सांप लोगों के घरों व अन्य इंसानी चहल-पहल वाले स्थानों में छिप रहे है। इस दौरान कई बार यह सांप लोगों को डस भी देते है। जिले में गत सप्ताह मारवाड़ जंक्शन क्षेत्र के बांता गांव में सर्पदंश ने एक किसान की मौत भी हो चुकी है। चिकित्सकों ने बताया कि बरसात के मौमस में सबसे ज्यादा सर्पदंश के मामले सामने आते है। इसके साथ ही इस तरह के केस में ही अंधविश्वास के चक्कर में लोगों की मौत हो जाती है।
सर्पदंश में अंधविश्वास बनता है मौत का कारण
चिकित्सकों ने बताया कि सर्पदंश में सबसे ज्यादा अंधविश्वास के कारण मौत का आंकड़ा बढ़ता है। जिले में सर्पदंश के मामले सबसे ज्यादा ग्रामीण क्षेत्रों से सामने आते है। ग्रामीण लोग आज भी सांप के डसने के बाद आज भी अस्पताल में उपचार के लिए ले जाने के बजाय देवताओं के थान पर बैठने वाले भोपों के पास लेकर जाते है। समय पर उपचार नहीं मिलने पर मरीज की स्थिति बिगडऩे के बाद उसे परिजन अस्पताल लाते है। जहां डॉक्टर मरीज को नहीं बचा पाते।
जिले में पाली जाती है सांप की 10 प्रजाती, 4 ज्यादा खतरनाक
वन विभाग के अधिकारियों की माने तो जिले में सांप की 10 प्रजातियां पाई जाती है। इसमें से 4 प्रजाती काफी खतरनाक है। अधिकारियों ने अनुसार पाली में कोबरा, नाग, पड व सॉ स्किल स्नेक काफी खतरनाक है। इनके डसने के बाद समय पर उपचार नहीं मिलने पर मौत हो सकती है।
सांप काटने पर घबराए नहीं
डाक्टर सलाह देते है कि सांप काटने के बाद पीडि़त को घबराना नहीं चाहिए। व्यक्ति के घबराने से उसके खून का प्रवाह तेज हो जाता है। और सांप का जहर तेजी से उसके शरीर में फैलता है। सांप के काटने के बाद पीडि़त को जल्द से जल्द इलाज मुहैया करवाना चाहिए। इससे उसकी जान बच सकती है।
मानसिकता बदलने की आवश्यकता
- अभी भी लोगों की अंधविश्वास के पीछे की मानसिकता नहीं बदल रही है। लोग अब भी उपचार करवाने के बजाए मरीज को टोना-टोटका व देवताओं के थान पर लेकर जाते है। अंधविश्वास के कारण सबसे ज्यादा सर्पदंश के मरीजों की ही मौत होती है। यह आंकड़ा ग्रामीण क्षेत्रों में काफी ज्यादा है।
- डॉ. दलजीतसिंह राणावत, मनोरोग विशेषज्ञ, बांगड़ मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल, पाली





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