चूरू.
कौशल नियोजन एवं उद्यमिता विभाग रोजगार कार्यालय की ओर से पंजीकृत युवाओं को दिए जाने वाले भत्ते का बेरोजगार पूरा लाभ नहीं ले पा रहे हैं। जिले में पिछले पांच साल की बात करें बेरोजगारी भत्ते के लिए सात हजार आवेदन आए। पहले साल भत्ते का लाभ लेने के बाद दूसरे साल हलफनामा विभाग में प्रस्तुत नहीं करने पर साढ़े तीन हजार आवेदन खारिज कर दिए गए। ऐसे में इनको बेरोजगार भत्ते से वंचित कर दिया गया। विभाग ने अक्षत योजना में पंजीकृत बेरोजगार युवाओं के लिए भत्ते की शुरुआत की थी। इसकी समय सीमा दो वर्ष रखी गई। उस समय सरकार ने सभी वर्ग के लिए पांच सौ रुपए प्रतिमाह देने का निर्णय किया था। उसके बाद सरकार ने छह सौ रुपए कर दिए। इस वर्ष एक अप्रेल से पुरुषों को ६५० रुपए एवं महिला तथा दिव्यांग को ७५० रुपए प्रतिमाह देने का निर्णय किया है। पहले पंजीयन एवं आवेदन लेने का कार्य विभाग करता था। वर्ष २०१२ से ई मित्र के माध्यम से ऑनलाइन संचालित कर
दिया गया।
हलफनामा देने का प्रावधान
हर माह भत्ता आशार्थी के बंैक खाते में जमा हो जाता है। इसमें एक वर्ष बाद हलफनामा देने का प्रावधान है। लेकिन पंजीकृत बेरोजागर युवा फार्म नहीं भरते हैं। ऐसे में उनका भत्ता बंद हो जाता है। वर्तमान में लगभ दो हजार युवा भत्ते के लिए पंजीकृत हैं। जिले में पिछले पांच वर्ष तक पांच करोड़ रुपए के भत्ते दिए जा चुके हैं।
ई-मित्र के भरोसे युवाओं को नुकसान
युवा ई-मित्र के माध्यम से इस योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन करते हैं। वे आवेदन के नियम व शर्त पर ध्यान नहीं देते। आशार्थी को चाहिए कि वे राजस्थान एसएसओ में स्वयं की आईडी बनाकर ऑनलाइन आवेदन करे। इससे उसे सभी नियम व शर्तों की जानकारी रह सकेगी। लेकिन वे नहीं दे रहे हैं।
ये हैं अक्षत योजना के पात्र
बेराजगारी भत्ता योजना प्रभारी नवीन खिडिय़ा ने बताया कि इस योजना का लाभ उन्हीं को मिलता है जो राजस्थान से स्नातक हों। इनमें सामान्य एवं ओबीसी के आशार्थी की आयु अधिकतम 30 वर्ष एवं एसी, एसटी तथा महिला आशार्थी की आयु 35 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। इसके साथ ही आशार्थी ने किसी सरकारी योजना का लाभ न लिया हो तथा उसके पास कोई प्रोफेशनल डिग्री न हो। वे ही इसके पात्र हैं। प्रोफेशनल डिग्री में एमबीबीएस, बीटेक, एमटेक, बीसीए, एमसीए, एलएलबी को शामिल किया गया है।
जिले में भत्ता प्राप्त करने वाले लगभग आधे युवाओं के हर वर्ष इस प्रक्रिया को पूरा न कर पाने के कारण नुकसान होता है।
राकेश चौधरी, जिला रोजगार अधिकारी, चूरू





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