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पहले कालांश में पढ़ेेंगे दूध का पाठ



एकल व दो शिक्षकों वाले स्कूलों में होगी परीक्षा
चित्तौडग़ढ़. सरकारी प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूलों में दो जुलाई से बच्चों को दूध पिलाने के लिए कागजी तैयारियां पूरी हो गई है,लेकिन हकीकत के धरातल पर कई सवाल घूम रहे है जिनका जवाब देने से अधिकारी भी बच रहे है। शिक्षण भी कई सवालों के जवाब अभी तलाश नहीं पाए है लेकिन मान रहे है कि योजना पर अमल शुरू होते ही समस्याएं उजागर होगी तो समाधान निकलेगा। सरकारी स्कूलों में अन्नपूर्णा दूध योजना के तहत कक्षा एक से आठवीं तक सप्ताह में तीन दिन बच्चों को प्रार्थना सभा के बाद दूध पिलाया जाएगा। ऐसे में संभावना यह भी है कि बच्चे पहला क्लास पढऩे की बजाए दूध पीने में ही समाप्त हो जाएगा।प्रमुख समस्या ऐसे स्कूलों में भी आने वाले ही जहां पर एकल शिक्षक या दो शिक्षक लगे हुए है।
जहां पर एक ही शिक्षक लगा हुआ है वहां पर शिक्षक पहले दूध लाकर बच्चों को पिलाएंगा। फिर बच्चे मिड-डे मिल के भोजन की व्यवस्था में लग जाएगा ऐसे सवाल यह है कि वह शिक्षक स्कूल का ताला कब खोलेगा और
पढ़ाएगा कब?
जानकारी के अनुसार जिले में ३७ स्कूल ऐसे है वहां पर एक भी शिक्षक नहीं वहीं ३२२ स्कूल ऐसे है जहां पर एक शिक्षक लगे हुए है। ऐसी ही बड़ी समस्या जहां पर दो शिक्षक लगे हुए वहां पर भी हो सकती है।
दूध फटा तो जिम्मेदार कौन
जानकारी के अनुसार यदि दूध फट जाता है तो उस दूध का भुगतान दूध समिति को नहीं किया जाएगा। लेकिन सवाल यह है कि यह कैसे तय होगा कि दूध वास्तव में खराब था या बर्तन की खराबी के वजह से दूध फटा।यदि दूध उपस्थिति से कम ज्यादा आया तो जिम्मेदार कौन?
प्रशिक्षण दिया नहीं, थमा दिए लेक्टोमीटर
दूध की गुणवत्ता जांच के लिए स्कूलों में लेक्टोमीटर तो दे दिए है। लेकिन जिले में एक भी शिक्षकों को दूध जांच के लिए किसी प्रकार का प्रशिक्षण नहीं दिया गया। लेक्टोमीटर से दूध की गुणवत्ता की जांच होगी लेकिन अन्य पौषक तत्वों की जांच कैसे होगी।

जहां पर एक या दो शिक्षक लगे है वहां पर परेशानी हो सकती है। लेकिन उन्हें ही अपने स्तर पर व्यवस्था करनी होगी। प्रशिक्षण को लेकर हमें कोई निर्देश नहीं मिले है।
नंदलाल कुम्हार, जिला शिक्षा अधिकारी, प्रारंभिक चित्तौडग़ढ़



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