उच्च शिक्षा आयुक्तालय के चार सदस्यीय जांच दल ने खंगाले दस्तावेज
चित्तौडग़ढ़. जिले के सबसे बड़े महाराणा प्रताप पीजी राजकीय महाविद्यालय में विकास शुल्क एवं यूजीसी अनुदान राशि उपयोग में उजागर घपले की अब कॉलेज शिक्षा आयुक्तालय स्तर पर पड़ताल शुरू हो गई है। आयुक्तालय की चार सदस्यीय टीम ने सोमवार को कॉलेज पहुंच दस्तावेज खंगाले। टीम जांच के बाद कई दस्तावेज अपने साथ जयपुर ले गई। टीम ने सुबह कॉलेज पहुंचने के बाद मामले में आरोपी निलंबित लिपिक विक्रम सिंह से पूछताछ की। टीम ने अनियमिताओं से जुड़े दस्तावेज खंगालने के साथ उनसे जुड़े कर्मचारियों व व्याख्याताओं से भी पूछताछ की। इसके माध्यम से ये जानने का प्रयास किया गया कि आखिर घपले की शुरूआत कैसे हुई और इसमें निलङ्क्षबत लिपिक के अलावा अन्य कौन कर्मचारी व अधिकारी लिप्त है।
जांच दल में लेखाधिकारी, लेखा प्रोफेसर सहित वरिष्ठ प्राचार्य शामिल थे। प्राचार्य रतनलाल जोशी ने बताया कि टीम जांच पूरी करने के बाद रिपोर्ट कॉलेज शिक्षा आयुक्त को सौपेंगी।जांच दल घपले संबंधित रिपोर्ट आयुक्त को सोंपेंगा। गौरतलब है कि घपला उजागर होने पर बाबू ने ६.३२ लाख रुपए जमा करा दिए थे।माना जा रहा है कि जांच पूरी होने पर और अधिक राश् िका घपला सामने आ सकता है। इस मामले में आरोपी बाबू के निलंबन के कुछ दिन बाद ही प्राचार्य आरएम कोचिटा का स्थानान्तरण भीलवाड़ा जिले के माण्डलगढ़ कॉलेज में कर देना भी चर्चा में है।
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विद्यार्थी परिषद ने सौंपा ज्ञापन
पीजी कॉलेज में सामने आए घपले शामिल दाषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग को लेकर विद्यार्थी परिषद ने सोमवार को उच्च शिक्षा आयुक्त के नाम प्राचार्य को ज्ञापन सौपा। ज्ञापन में बैंक खातों की १० वर्षों की ओडिट कराने, गबन की राशि को पुन: वसुल कर महाविद्यालय कोष में जमा कराई सहित कई मांग की गई। विभाग संयोजक रतनलाल वैष्णव ने कहा कि १५ दिन में उच्च स्तरीय जांच के बाद कार्रवाई की जाए अन्यथा परिषद आंदोलन करेगी।





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