सुरेश जैन. भीलवाड़ा।
सरकार ने किसानों को ऋण बांटने के लिए सहकारी समितियों को बजट दिया लेकिन इसे बांटने में व्यवस्थापकों ने खूब मनमानी की। बात खुद की आई तो नियम ताक पर रखकर व्यवस्थापकों ने ही ऋण उठा लिया। सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक प्रबंधन को पता चला, फिर भी अनदेखी की। राजस्थान पत्रिका ने पड़ताल की तो सामने आया कि व्यवस्थापकों ने अपात्रों को भी ऋण दे दिया। खास बात है कि इन्होंने सरकार की ऋणमाफी योजना का फायदा भी उठा लिया।
अभी ऋण माफी शिविर का लाभ राज्य के स्थायी कर्मचारी ले रहे है, जबकि सरकारी निर्देश की मानें तो ऐसे कर्मचारी इस योजना का लाभ नहीं ले सकते है जो सहकारी क्षेत्र की संस्था का पूर्णकालिक कार्मिक है। प्रदेश की ग्राम सहकारी समितियों के व्यवस्थापक जो स्थायी हैंं वे मनमाने ढंग से ऋण लेकर सरकार की ऋण माफी योजना के तहत 50 हजार रुपए तक ऋण भी माफ करा लिया है।
राजस्थान पत्रिका ने कई व्यवस्थापकों से बात की। इनमें कुछ ही ऐसे थे जिन्होंने इसका लाभ नहीं लिया जबकि जिले की कई समितियों के व्यवस्थापक लाभ लेने से पीछे नहीं रहे। बिना ब्याज की इस राशि से व्यवस्थापक ब्याज का खेल खेल रहे है। इसका खुलासा जिले भर में ऋण माफी प्रमाण पत्र वितरण के माध्यम से हुआ। इस सूची में किसानों के साथ ही व्यवस्थापकों के नाम ऋण होने तथा 50 हजार का ऋण माफी तक हवाला दिया है।
इन्हें नहीं मिल सकता लाभ
वर्तमान व पूर्व मंत्री (केंद्र व राज्य सरकार) वर्तमान व पूर्व सांसद व विधायक। आयकरदाता कृषक। राज्य व केंद्र सरकार का वेतनभोगी व सेवानिवृत्त अधिकारी व कर्मचारी। नियमित पेंशनधारी, निगमों के पदाधिकारी, आयोग अध्यक्ष, सदस्य। बैंकों या सार्वजनिक, प्राइवेट, सहकारी बैंक के पदाधिकारी, कार्मिक व पेंशनर्स। राज्य व केंद्रीय स्वायत्तशासी संस्थाओं व सार्वजनिक उपक्रमों में पदाधिकारी, कार्मिक व पेंशनर्स। पंचायतीराज संस्थाओं का कार्मिक। प्रधान व जिला प्रमुख। सहकारी संस्थाओं का पूर्णकालिक कार्मिक।
ऐसे होता रहा खेल
किसानों के पास पांच से आठ बीघा जमीन होने के बाद भी समिति व्यवस्थापक उन्हें 30 से 80 हजार तक का ही ऋण देते है। पांच बीघा जमीन पर व्यवस्थापक 1.40 लाख रुपए तक ऋण उठा लेते है। समिति के माध्यम से अधिकतम ऋण का प्रावधान भी डेढ़ लाख रुपए है। इस लिमिट का व्यवस्थापक फायदा उठा रहे है। व्यवस्थापक हर साल अपने खाते में राशि जमा बताकर उतनी राशि का वापस ऋण उठा भी लेते हैं।
जीवा का खेड़ा व्यवस्थापक राम कुमार जाट के 5 बीघा से अधिक जमीन है। उसने समिति से 1.43 लाख का ऋण ले रखा है। 50 हजार ऋण माफी के लिए शपथ पत्र दे लाभ ले लिया।
बड़लियास व्यवस्थापक मदनलाल धाकड़ के पास 5-6 बीघा जमीन है। धाकड़ ने समिति से 1.48 लाख का ऋण ले रखा है। ऋण माफी शिविर में 50 हजार का ऋण माफी प्रमाण पत्र प्राप्त कर लिया।
भीलवाड़ा के निकटवर्ती हलेड़ की समिति के व्यवस्थापक उदयलाल गाडरी ने समिति से 1 लाख रुपए का ऋण लिया। इसमें से 50 हजार का ऋण माफी का लाभ लेते हुए प्रमाण पत्र प्राप्त किया।
जले में पहले 197 समितियां थी। वर्ष 2011-12 के बाद नई समितियां बनाई थी। अब जिले में 351 समितियां है। लेकिन स्थायी व्यवस्थापक 170 है। शेष में अस्थायी है। ऋण माफी का लाभ स्थायी व्यवस्थापक नहीं ले सकता है। उन्हें शपथ पत्र भी देना होगा। किसी अस्थायी व्यवस्थापक ने ऋण माफी का लाभ लिया होगा। फिर भी ऐसा कोई प्रकरण है तो उसकी जांच कराएंगे।
अनिल काबरा, प्रबंधक केंद्रीय सहकारी बैंक भीलवाड़ा





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