करौली/खेड़लीगुर्जर.
सियाचिन के ऑपरेशनल एरिया में गश्ती करने वाले हवलदार लक्ष्मणसिंह गुर्जर (३७) नहीं रहे। बर्फीले तूफान में तबीयत बिगडऩे के बाद उपचार के दौरान उन्हें मृत्यु ने छीन लिया।
शंकरपुर की ढाणी में उसकी पार्थिव देह पहुंचाई गई। जहां उसकी अन्तिम यात्रा में शामिल होने के लिए आसपास के गांवों के लोगों के अलावा पुलिस-प्रशासन के अधिकारी व राजनेता भी पहुंचे।
सैन्य सम्मान से की गई अंत्येष्टि के दौरान जब मृतक के डेढ़ वर्षीय पुत्र ओमेन्द्र ने मुखाग्नि दी तो लोगों की आंखों से आसंू छलक पड़े। मासूम को पता भी नहीं था कि पिता का साया उसके सिर से उठ चुका है। मृतक लक्ष्मण की पत्नी कस्तूरी देवी लगातार रोने से बार-बार बेहोश हो रही थी।
मुखाग्नि देने से पहले 11वीं आर्मी बटालियन के नायब सूबेदार तविंदर, चंचल सिंह व सुरेंद्र सिंह ने पुष्पचक्र अर्पित किया। इस दौरान सपोटरा विधायक रमेश मीणा, हिण्डौनसिटी विधायक राजकुमारी, पूर्व मंत्री भरोसीलाल, गुर्जर नेता कर्नल किरोड़ी बैंसला, तिघरिया सरपंच हरप्रसाद तंवर, महू इब्राहिमपुर सरपंच शिवसिंह खेरवाल, एसडीओ डॉ. दुलीचंद मीणा, डीएसपी मंजीतसिंह, सदर थानाप्रभारी रामवीरसिंह भी श्रद्धांजलि देने पहुंचे।
सड़क से उतरी सेना की गाड़ी, जेसीबी बुलाकर निकाला बाहर
खेड़ली गुर्जर. हवलदार लक्ष्मणसिंह का शव एम्बुलेंस से लाया गया। एम्बुलेंस के आगे सेना का ट्रक चल रहा था। ट्रक करई गांव से कल्याणपुरा की ओर जा रही संकरी सड़क से नीचे खेतों में उतर कर फंस गया। गनीमत रही की ट्रक के एक तरफ के दोनों पहिए सड़क से नीचे उतरने के बाद भी पलटा नहीं, जिससे बड़ा हादसा टल गया।
बाद में प्रशासनिक अधिकारियों ने दो जेसीबी बुलाकर ट्रक को खेत से निकलवाया। महू इब्रहिमपुर चौकी प्रभारी ऋषिकेश ने बताया कि सेना का ट्रक व एम्बुलेन्स शव को लेकर शंकरपुरा की ढाणी जा रहे थे। इस बीच रास्ते में करई पुलिया से कुछ दूर कल्याणपुर की जाने वाली इन्टरलोकिंग सड़क से ट्रक के पहिए खेत में उतर गए।
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