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राजस्थान की इन सबसे बड़ी भर्तियों में हो रहा यह सबसे बड़ा 'मजाक'

अजय शर्मा
सीकर. गलत प्रश्नों व पेपर आउट के विवादों के कारण प्रदेश में सरकारी भर्ती उलझती जा रही है। इस कारण युवाओं का नौकरी का सपना भी टूट रहा है। प्रदेश में रीट, पुलिस भर्ती, द्वितीय श्रेणी विशेष शिक्षक, एलडीसी, वन रक्षक सहित अन्य भर्ती उलझी हुई हैं। कई भर्ती तो पांच वर्ष बाद भी धरातल पर नहीं आ रही है। जबकि सरकार प्रश्न पत्रों को एक्सपर्ट सहित अन्य कमेटियों से जांच भी कराती है।


इसके बाद भी प्रश्नों के विवाद में भर्तियों के फंसने से परीक्षा एजेंसियों की साख पर सवाल खड़े हो रहे हैं। ज्यादातर भर्ती परीक्षाओं में तीन से लेकर 15 प्रश्नों का विवाद हुआ है। कई भर्तियों में आखिरकार बोनस अंक भी देने पड़ रहे है। इस कारण परिणाम भी प्रभावित हो रहा है। जबकि सरकार ने सुराज संकल्प यात्रा के दौरान भर्ती परीक्षाओं को पारदर्शी तरीके से कराने का दावा किया था।


यह भर्ती भी अटकी


वर्ष 2016 में शुरू हुई ग्रामसेवक भर्ती भी अब तक पूरी नहीं हो सकी। प्रतीक्षा सूची के अभ्यर्थियों को अब तक नौकरी नहीं मिल सकी है। पंचायत सहायक भर्ती पिछलीे सरकार के समय शुरू हुई जो अब तक पूरी नहीं हो सकी है। अब तक प्रदेशभर में तीन हजार से अधिक ग्राम पंचायतों में नियुक्ति नहीं हो सकी।


दूसरी तरफ माध्यमिक शिक्षा विभाग की स्कूल लेक्चरर भर्ती 2015, द्वितीय श्रेणी शिक्षक भर्ती 2016, शिक्षक भर्ती 2015, राजस्थान लोक सेवा आयोग की ओर से होने वाली पुलिस सब इंस्पेक्टर भर्ती 2016, आरएएस भर्ती 2016, पटवार भर्ती 2015, जेल प्रेहरी 2015, जलदाय विभाग में तकनीकी सहित अन्य पदों की भर्ती, कनिष्ठ अभियंता भर्ती 2016, लिपिक भर्ती 2017, संस्कृत शिक्षा, आईटी विभाग, भूवैज्ञानिक, वन रक्षक भर्ती भी इन्ही कारणों से विवादों मेंं रही है।

 

 

रीट परीक्षा 2017


इस भर्ती में करीब 8 लाख अभ्यर्थी प्रभावित हो रहे है। पांच प्रश्न व पेपर आउट होने का मामला कोर्ट में विचाराधीन है। जिसके चलते 54 हजार पदों की तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती नही हो पा रही है। स्कूलों में शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है।

 

 

Rajasthan Police Constable Recruitment 2018

 

कांस्टेबल भर्ती भी पेपर आउट होने के कारण कोर्ट में पहुंच गई है। इस भर्ती के लिए इस महीने ही दुबारा परीक्षा हुई है। लेकिन कोटा के एक परीक्षा केन्द्र के मामले के कारण परीक्षा विवादों में घिर गई है।

 

भर्ती एजेंसियों की तय हो जिम्मेदारी

 

राजस्थान उच्च न्यायालय के अधिवक्ता संदीप कलवानियां का कहना है कि भर्तियां समय पर पूरी नही होने से अभ्यर्थियों को समस्याओं का सामना करना पड़ता है। जानकार बताते हैं कि भर्ती एजेन्सियों को पहले प्रश्न पत्र का अध्ययन कराना चाहिए, ताकि प्रश्नों के विवाद को लेकर मामला न्यायालय तक नहीं पहुंचे। परीक्षा भी पूरी तरह पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए, ताकि पेपर आऊट सहित अन्य मामलों को लेकर भर्ती अटके नहीं।



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