जालोर. जालोर शहर के चूड़ीगर मौहल्ला में शनिवार देर रात एक युवक ने चाकू से वारकर एक युवक की हत्या कर दी, जबकि दूसरे युवक को घायल कर दिया। मृतक और घायल दोनों आरोपित के भांजे बताए जा रहे हैं, हालांकि अभी तक प्रकरण दर्ज नहीं हुआ है। जिससे इलाके में सनसनी फेल गई। पुलिस के अनुसार आरोपी मुन्ना खान खोखर ने लेनदेन विवाद में अपने भांजे सुल्तान खान व रुस्तम खान पर हमला कर घायल कर दिया। चाकू के वार से गंभीर घायल सुल्तान खान को रेफर किया गया, लेकिन उसने दम तोड़ दिया। सूत्रों अनुसार चूडीघर मौहल्ला में सुल्तान खान पर चाकुओं से हमला कर उसको जान से मार दिया। वहीं छोट भाई रुस्तम खान को गम्भीर चोट लगने से जालोर अस्पताल में भर्ती कराया गया इस मामले में आरोपी मुन्ना खान को पुलिस तलाश कर रही है।
ब्याज का काम करता है आरोपित
मुन्ना खान खोखर आदतन बदमाश प्रवृत्ति का व्यक्ति है और यह मुख्य रूप से ब्याज पर रुपए लेन देन का काम करता है। यह घटनाक्रम भी लेनदेन के विवाद में बताया जा रहा है। अभी पुलिस आरोपित को पकड़ नहीं पाई है। आरोपित के पकड़ में आने के बाद मामले का पूरी तरह से खुलासा हो सकेगा।
एचडीएफसी बैंक पर 25 हजार रुपए का जुर्माना
व्यक्तिगत लोन का बकाया जमा करने पर भी काटा गया था ब्याज और राशि जमा ही नहीं दर्शाई गई
जालोर. एचडीएफसी बैंक भीनमाल को एक मामले में मनमर्जी भारी पड़ी और उपभोक्ता मंच ने इस मामले में बैंक प्रशासन को दोषी मानते हुए 25 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है।
मामले के अनुसार धानसा निवासी नरेंद्रसिंह राठौड़ पुत्र तखतसिंह राजपूत ने व्यक्तिगत ऋण का बकाया जमा करवाने के बाद भी बैंक प्रशासन द्वारा लापरवाही बरतने और राशि जमा होने के बाद भी उसे जमा नहीं दर्शाते हुए ऋण राशि काटने पर प्रबंध निदेशक एचडीएफसी बैंक भीनमाल व प्रबंधक एसबीआई भीनमाल के विरुद्ध प्रकरण पेश किया। परिवाद के अनुसार नरेंद्रङ्क्षसह ने वर्ष 2015 में 4 लाख 30 हजार रुपए का व्यक्तिगत ऋण एचडीएफसी बैंक से लिया था। जिस ऋण की प्रतिमाह अदायगी किश्त 12 हजार 6 6 5 रुपए थी। नरेंद्रसिंह सरकारी कर्मचारी है और उसका वेतन खाता एसबीआई भीनमाल में खुलवा रखा है, जिसमें से एचडीएफसी बैंक को लोन किश्त की अदा की जाती थी। एचडीएफसी बैंक में ऋण पर ब्याज दर अधिक होने पर प्रार्थी ने एसबीआई से मार्च 2018 में पर्सनल लोन लेकर 19 मार्च 2018 को एचडीएफसी बैंक को जरिए नेफ्ट बकाया ऋण 2 लाख 40 हजार जमा करवा दिए। बैंक द्वारा इसके बाद 28 हजार 500 रुपए बकाया बताने पर यह राशि भी प्रार्थी ने 19 मार्च को जमा करवाई गई।जिसके बाद प्रार्थी ने नो ड्यू प्रमाण पत्र मांगा, जिसके लिए चक्कर कटवाए गए। इस बीच 7 अपे्रल 2018 को एचडीएफसी ने उसके बचत खाते से 12 हजार 6 6 5 रुपए की किश्त काटी। जानकारी लेने पर बैंक ने बताया कि 2 लाख 4 हजार रुपए जमा नहीं हुए है। स्टेटमेंट मांगने पर बैंक प्रशासन की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। जिसके बाद प्रार्थी ने परेशान होकर उपभोक्ता मंच में परिवाद पेश किया। जिसमें एचडीएफसी बैंक भीनमाल और एसबीआई बैंक भीनमाल के पक्षकारों ने पक्ष रखा। दोनों पक्षों के सुनने के बाद इस मामले में उपभोक्ता मंच के अध्यक्ष ने एचडीएफसी बैंक को दोषी माना। जिसके बाद आदेश दिया कि निर्णय के 30 दिन के भीतर एचडीएफसी बैंक प्रार्थी को आर्थिक क्षतिपूर्ति के 10 हजार, मानसिक व शारीरिक क्षतिपूर्ति के 10 हजार तथा परिवाद व्यय के 5 हजार समेत कुल 25 हजार रुपए अदा करें। साथ ही इस अवधि में राशि का भुगतान नहीं करने पर 9 मई 2018 से तारीख अदायगी तक 12 प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज प्राप्त करने के भी आदेश दिए।





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