छोटीसादड़ी. नगर की सडक़ों को बारिश के पहले ठीक करने का वायदा पूरा नहीं हो सका है। बारिश के एक माह निकलने के बाद भी शहर की गड्डे और खस्तहाल सडक़ें लोगों की परीक्षा ले रही हैं। खस्ताहाल नगर के लोगों की परेशानियां कम होने की जगह अधिक बढ़ गई है।
नगर में हालात यह हैं कि कहीं कही तो बनी- बनाई सडक़ों को तोड़ कर नवीन सडक़ का निर्माण किया गया । कहीं-कहीं तो सडक़ ही नहीं बनी है तो कहीं सडक़ों पर गड्डे आपका स्वागत करने तैयार हैं।
जहां सडक़ बन गई है तो रास्ते में नालियों का अधूरा काम पड़ा है। नालियां सडक़ से नीची रहने के चलते वाहन धारियों व उस पर सवार महिलाओं ओर यात्रियों को जबरदस्त झटके दे रही हैं।कई बार तो वाहन धारी खतरों को निमंत्रण दे रही नालियों से दुर्घटना ग्रस्त हो गए है। खासी परेशानियां तो गर्भवती महिलाओं व रोगियों को ले जाते वक्त आ रही है।
गड्ढे तो नहीं है, लेकिन गड्ढों में सडक़ जरूर है...
कब्रिस्तान से लेकर प्रसिद्ध व प्रमुख शक्ति पीठ भंवर माता दार्शनिक स्थल तक पहुंचने वाली सडक़ जिम्मेवारों की अनदेखी के चलते सडक़ चलने लायक नहीं बची है।
बदहाल सडक़ों ने लोगों को परेशान कर रखा है। भैया कहा जा रहे हो उधर से नहीं इधर से जाओ, नहीं तो पांच मिनट में पहुंचने की जगह आधा घंटा लग जाएगा। ये सडक़ कुछ दिन पहले इसकी मरम्मत की थी, लेकिन बारिश के कारण बह गई है। इस रोड पर गड्डे े तो नहीं है, लेकिन गड्डे ं में सडक़ जरूर है। कुछ इस तरह के संवाद प्रतिदिन सुनने मिल रहे हैं। लोगों को कीचड़ ओर गड्डों से सने हुए मार्ग से गुजरना पड़ रहा है। बारिश होने के साथ ही इन खस्ताहाल सडक़ों ने लोगों को परेशानियों के बीच रहने को मजबूर कर दिया है।
इन गड्डे भरी सडक़ों पर लगभग हर दिन लोग दुघर्टनाग्रस्त हो रहे हैं। शहर की भीतरी सडक़ों को खोद कर इंटर लॉकिंग की गई है जो अपना हाल बया करते हुए गलियों की खूबसूरती को बिगाड़ रही है।





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