प्रतापगढ़ दोनों आंखों की रोशनी खो देने वाली 13 साल की अमृता की अंधियारी आंखों में दो चिकित्सकों ने मिलकर उजियारा भर दिया। डॉक्टर्स-डे पर रविवार को सर्जरी के बाद अमृता ने जब आंखें खोली तो उसकी काली स्याह जिंदगी में फिर से रंग दिखे, तो वह खिलकर चहक उठी। लेकिन अमृता को अब खुद ही डॉक्टर बनकर उम्रभर खुद के शरीर में इंजेक्शन लगाना पड़ेगा। दरअसल, डायबिटिज के कारण उसके शरीर में इन्सुलिन का बैलेंस बिगड़ गया है, जिसका एकमात्र उपचार इंन्सुलिन है। जो शरीर में इंजेक्शन के जरिए ही पहुंचाया जा सकता हैं। उसकी आंखों की रोशनी लौटाने वाले चिकित्सक नेत्र रोग विषेशज्ञ डॉ. राधेष्याम कच्छावा व शिशु रोग विषेशज्ञ डॉ. धीरज सेन ने बताया कि प्रतापगढ़ के ठिकरियां केसरापुरा गांव की रहने वाली अमृता बहुत ही गरीब परिवार से थी। दस भाई-बहनों में सबसे छोटी अमृता की हालत और उसके पढऩे के जज्बे को देखते हुए उसे स्पेशल केस मानकर भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना में पंजीकृत किया गया। जिसमें बच्ची के परिवार पर कोई आर्थिक बोझ नहीं पड़ा और सफल सर्जरी के बाद उसकी आंखों की रोशनी लौट आई है। दोनों ही चिकित्सक अमृता की मुस्कान को देखकर अपने पेशे पर काफी खुश है।
इंन्सुलिन इंजेक्शन लगाने का दे रहे प्रशिक्षण
ऑपरेशन के बाद बच्ची की दोनों आंखों की रोशनी लौट आई है, लेकिन अमृता को जिंदगी भर इन्सुलिन इंजेक्शन लेना पड़ेगा। ऐसे में उसे खुद की देखभाल करने के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है। नेत्र रोग विषेशज्ञ डॉ. राधेश्याम कच्छावा ने बताया कि अमृता को अभी आब्र्जवेशन में रखा गया है, लेकिन जब यहां से उसको छुट्टी दी जाएगी तो उसे घर पर इंन्सुलिन की डोज लेना होगा। ऐसे में दवा और इंजेक्शन की जानकारी देकर उसको लगाने के तरीके बताए जा रहे है। एक बार प्रशिक्षित हो जाने पर वह खुद ही अपने शरीर का ध्यान रख सकेगी।
डॉक्टर्स डे पर जिला चिकित्सालय में रोपे पौधे
प्रतापगढ़ जैसे डॉक्टर्स रोगी की जान बचाते है, उसकी प्रकार पेड़ पौधे भी वातारण के डॉक्टर्स है। जो प्रदूशण को सोखकर जीवनदायिनी ऑक्सीजन देकर सांसो को चलाते है। इसी ध्येय के साथ रविवार को डॉक्टर्स-डे पर जिला चिकित्सालय में पौधरोपण किया गया। पीएमओ डॉ. राधेश्याम कच्छावा, उप नियंत्रक डॉ. ओपी दायमा व शिुशु रोग विषेशज्ञ डॉ. धीरज सेन और उनकी चिकित्सकों की टीम ने जिला चिकित्सालय परिसर में पौधे रोपे। इस अवसर पर पीएमओ डॉ कच्छावा ने कहा कि पेड़ पौधे प्रकृति के डॉक्टर्स है, जो बिना फीस लिए सबको प्राणवायु देते है। डॉ धीरज सेन ने कहा कि डॉक्टर्स डे पर उनका लक्ष्य है, प्रकृति के इन नायाब डॉक्टरों की संख्या बढ़ाई जाए, जिसके लिए कम से कम एक पौधा एक डॉक्टर जरूर रोपे और उसकी देखभाल करें। ताकि अस्पताल परिसर स्वच्छ और हरा भरा रहें है। इस अवसर पर शिशु रोग विषेशज्ञ डॉ. सारांश सबल, दंत रोग विषेशज्ञ डॉ. पर्वतसिंह, डॉ मनीश व एएनएमटीसी की छात्राएं और स्टाफ मौजूद रहा।





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