सीकर. एक और किसानों की आय बढ़ाने के दावे किए जा रहे हैं वही दूसरी ओर केन्द्र सरकार ने जिले के पशुपालकों की आंखों में धूल झोंक दी है। इसकी बानगी है कि मनरेगा के तहत प्रत्येक गांव में बनाए जाने वाले कैटल शेड की फाइलें। जो कई रास्ते तय करने के बाद अब पशुपालन विभाग में धूल झोंक रहे हैं।
यूं समझें मामला
मनरेगा योजना के तहत १२ पशुपालकों के लिए कैटल शेड बनाए जाने थे । इसके लिए जिले की सभी ग्राम पंचायतों से आवेदन मांगे गए थे। और पशुपालन विभाग को योजना का नोडल अधिकारी बनाया गया। आवेदन करने के बाद पशुपालन विभाग ने सभी आवेदन को जिला परिषद में भेज दिया। जहां से आवेदनों को मुख्यालय भेजा गया। लेकिन, अब यह आवेदन मुख्यालय में धूल फांक रहे हैं। जिससे योजना भी इन फाइलों में ही कैद होकर धूल फांक रही है। गौरतलब है कि जिला परिषद की ओर से इस पर अनुदान की अधिकतम राशि तीन लाख रुपए की थी। इसके लिए जिले की विभिन्न पंचायत समितियों से पांच हजार 379 पशुपालकों ने आवेदन दिए थे।
यूं होना था लाभार्थियों का चयन
प्रत्येक ग्राम पंचायत से तीन-तीन अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति व गरीबी रेखा से नीचे जीवन गुजारने वाले लघु सीमांत किसान व पशुपालक चयनित होने थे। चयनित पशुपालक के पास दो बडे मवेशी, एक गाय या भैंस होना जरूरी था। लघु व सीमांत किसानों के प्रत्येक परिवार के पास अधिकतम दो बीघा भूमि जरूरी थी। चयन होने के बाद किसान को आवेदन कर पशुपालन विभाग को भेजना था। जिसके लिए किसान को अपना आवेदन अपने संबंधित क्षेत्र के पशु चिकित्सक से सत्यापित भी करवाना था। लेकिन, इतनी कवायद के बाद भी सरकार की अनदेखी से किसानों को योजना का लाभ नहीं मिल रहा। ऐसे में कहा जा सकता है कि किसानों को आंखों का तारा बनाने का दिखावा करने वाली सरकार किसानों की आंखों में धूल झोंक रही है।





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