फैक्ट फाइल
1400 ग्रेनाइट इकाइयां जालोर
60 हजार के लगभग कुल लेबर जालोर में
40 हजार के लगभग लेबर केवल ग्रेनाइट उद्योग में
खुशालसिंह भाटी
जालोर. जालोर की पहचान माना जाने वाला ग्रेनाइट उद्योग इन इकाइयों में काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा और हितों को लेकर लापरवाह है और अपने फायदे के लिए जिम्मेदारी से भी बच रहा हैं। फैक्ट्री एक्ट के अंतर्गत 20 या अधिक श्रमिक वाली ग्रेनाइट इकाइयों की सुरक्षा और सेफ्टी को लेकर फैक्ट्री एवं बोइलर डिपार्टमेंट जिम्मेदार है।
यह विभाग समय समय पर ऐसी इकाइयों का निरीक्षण कर श्रमिक हितों की निगरानी करता है। साथ ही सेफ्टी मैनेजमेंट को भी देखता है। निरीक्षण में यह भी देखा जाता है कि इन इकाइयों में कहीं ऐसी संभावना न हो जहां हादसे की आशंका हो, लेकिन उद्यमियों ने इस विभाग से बचने के लिए आंकड़ों को ही झुठला दिया है।
जालोर में फतेह ग्रेनाइट समेत 4 से 5 ग्रेनाइट इकाइयां ही ऐसी है, जो इस विभाग के अंतर्गस रजिस्टर्ड है और श्रमिक हितों के प्रति सजग, शेष सभी इकाइयों ने अपने श्रमिकों की सीमा 20 से कम ही प्रदर्शित कर रखी है, जिससे उद्यमी दोहरा फायदा उठा रहे हैं। जबकि इस विभाग में इकाई रजिस्टर्ड होने पर ग्रेनाइट इकाइयों में गंभीर हादसे होने की स्थिति में इनको मिलने वाले मुआवजे और हादसे के कारणों पर इस विभाग की रिपोर्ट श्रमिकों के परिजनों को लाभ का माध्यम बन सकता है, लेकिन उद्यमियों की हठधर्मिता से ऐसा नहीं हो पा रहा। जबकि विभागीय स्तर पर इसके लिए पहल पूर्व में हुई थी।
इसलिए बच रहे
यह विभाग इकाइयों में श्रमिकों की सुरक्षा के लिए निगरानी के साथ साथ ऐसी इकाइयों में मिलने वाली कमियों को दूर भी करवाता है। सभी ग्रेनाइट इकाइयों में पत्थरों के बड़े बड़े ढेर है और पिछले रविवार को जागनाथ ग्रेनाइट स्टोन में हुए हादसे में ग्रेनाइट उद्यमी की लापरवाही भी सामने आई। इस इकाई में ब्लॉक के नीचे श्रमिक की दबने से मौत हो गई थी। यदि यह इकाई भी रजिस्टर्ड होती हो विभागीय अधिकारी सर्वे के आधार कमियों को देखने के साथ साथ श्रमिक को मिलने वाले मुआवजे में उसके हितों की बेहतर अनुशंषा भी विभाग की ओर से की जाती, लेकिन उद्यमी केवल खुद का फायदा देख रहे हैं, इसलिए ऐसा नहीं हो पा रहा।
यूं समझें रजिस्ट्रेशन का मतलब
इकाई रजिस्टर्ड होने के साथ श्रमिक सुरक्षा को तवज्जो अधिक दी जाती है। साथ ही इन श्रमिकों की पूरी जानकारी विभागीय अधिकारियों के पास रहती है। इन श्रमिकों को पीएफ और ईएसआई जैसे फायदे भी रजिस्टे्रशन के बाद होते हैं, लेकिन उद्यमियों ने इस मामले में मौन धारण कर रखा है।
हमने किया था प्रयास
& जालोर में ग्रेनाइट इकाइयां काफी अधिक है और 20 या अधिक लेबर वाली यूनिट्स में श्रमिकों की सेफ्टी व उनके हितों की सुरक्षा की जिम्मेदारी हमारे विभाग की है। हमने जालोर में इन इकाइयों को रजिस्टर्ड करने का प्रयास किया, लेकिन उद्यमी सहमत नहीं हुए।
-रमेश पुरोहित, डिप्टी चीफ, फैक्ट्री एंडबॉयलर, जयपुर





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