हाथीदांत का बुरादा व वन्यजीवों का प्रतिबंधित सामान बेचने का आरोपी व्यापारी सुरेश जैन व उसके नौकर अशोक से वन विभाग की अनुमति के बिना अलवर नहीं छोडऩे एवं बुलाने पर कार्यालय में उपस्थित होने का शपथ पत्र भरवाए है। वहीं वन विभाग दुकान से जब्त हाथीदांत का बुरादा व अन्य प्रतिबंधित सामान को फोरेंसिक जांच के लिए देहरादून भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) की लैब में भेजेगा। हालांकि जांच के दौरान व्यापारी ने जब्त वन्यजीव के सामान को नकली बताया और दिल्ली से लाने की बात स्वीकारी।
वन विभाग की ओर से पंसारी बाजार में सोमवार रात जब्त हाथीदांत का बुरादा, वन्यजीव की खाल से बने गोल गेंदनुमा सामान को जांच के लिए डब्ल्यूआईआई की लैब में भेजेगा। लैब की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई निर्धारित की जाएगी। फिलहाल वन विभाग ने व्यापारी सुरेश जैन के खिलाफ वन्यजीव अधिनियम में वन्यजीवों के प्रतिबंधित सामान बेचने के आरोप में मामला दर्ज किया है। यह मामला गैर जमानती है। वहीं दुकान पर कार्य करने वाले कर्मचारी अशोक के भी बयान दर्ज किए गए हैं।
बताया नकली
वन्यजीवों की प्रतिबंधित सामग्री बेचने वाले के आरोपी व्यापारी सुरेश जैन ने जांच के दौरान बताया कि दुकान पर बिकने वाला हाथीदांत बुरादा नकली है। वे इस बुरादे को दिल्ली से लाकर बेचते हैं। वहीं श्रंग, भस्म, मृग कस्तूरी आदि सामान आयुर्वेद औषधी केन्द्रों से लाकर बेचते हैं।
रिपोर्ट तय करेगी जांच की दिशा
व्यापारी सुरेश के खिलाफ दर्ज मामले की दिशा डब्ल्यूआईआई की फोरेंसिक लैब से आने वाली जांच रिपोर्ट तय करेगी। यदि जांच रिपोर्ट में जब्त सामान वन्यजीवों का पाया गया तो वन्यजीव अधिनियम की अनेक सख्त धाराएं लगेंगी। जांच में सामान नकली पाया तो मामला कमजोर होना तय है।
आधा किलो पाउडर जब्त
टीम ने वन्यजीव अधिनियम की धारा 50 के तहत दुकान की तलाशी लेते समय करीब आधा किलो सफेद बुरादा जब्त किया था। शिकायतकर्ता ने इस सफेद चूर्ण को हाथीदांत का बुरादा बताया। इसके अलावा दुकान से एक गोल गेंद नुमा वस्तु बरामद की गई, इसमें काले रंग का चूर्ण भरा था। यह वस्तु किसी वन्यजीव की खाल से बनी लगती है। वहीं इसमें भरे काले रंग का चूर्ण मृग कस्तूरी बताया गया है।





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