जैसलमेर. जिस रियासतकालीन गड़ीसर सरोवर का पानी कभी सालों-साल भरा रहता था, वर्तमान में उसकी हालत एक साल भी अच्छी बारिश न हो तो खस्ता होने लगती है। दरअसल, गड़ीसर के आगोर तथा जल आवक क्षेत्र में अंधाधुंध ढंग से कचरा गिराए जाने और आबादी के बस जाने से स्थितियां लगातार विकट हो रही हैं। तालाब में केचमेंट एरिया के जरिए आने वाले पानी का मार्ग कई स्थानों पर अवरुद्ध हो गया है, जिससे पानी की आवक प्रभावित हुई है। स्वर्णनगरी के ऐतिहासिक गड़ीसर तालाब में बरसाती पानी की आवक दिनों दिन कम होती जा रही है। बारिश के दौरान तालाब में जिस मार्ग से होकर पानी आता है, उस मार्ग को केचमेंट एरिया घोषित किया हुआ था, लेकिन यह इलाका अनेक कारणों से बाधित होने से पानी की आवक पर बेतहाशा असर पड़ा है।
किसी को नहीं परवाह
गड़ीसर के आगोर क्षेत्र में मलबे और कचरे के बड़े ढेर देखे जा सकते हैं। तेज बारिश होने पर पानी में यही कचरा बहकर गड़ीसर तक पहुंच जाता है। ऐसे में उसकी जल भराव क्षमता पर विपरीत असर पड़ता है। इसके अलावा मलबे के ढेर, झाड़-झंखाड़ और आगोर क्षेत्र में बने बड़े गड्ढ़े जलराशि को बीच रास्ते में रोकते हैं। कई जने तो खेती कार्य तक करने लग गए हैं। गत दिनों हद तो तब हो गई जब गड़ीसर के जल प्रवाह क्षेत्र में बिजली के पोल तथा डीपी लगा दी गई। सरोवर मित्र गिरिराज पुरोहित बताते हैं कि जैसलमेर नगरपरिषद की ओर से रानीसर तालाब से डूंगराराम की ढाणी तक पक्की सडक़ का निर्माण करवाने की योजना है। उन्होंने इसका विरोध करते हुए बताया कि डामर सडक़ बन जाने से आने वाले समय में गड़ीसर में बरसाती पानी की आवक प्रभावित होगी।
योजना जिसने दम तोड़ा
-गड़ीसर तालाब वर्ष भर पानी से भरा रहे, इसके लिए जिला प्रशासन ने वर्ष 1993 में एक योजना बनाई और तालाब में इंदिरा गांधी नहर का पानी डाला गया।
-पर्यटन के लिहाज से इस योजना को मूर्त रूप दिया गया था, ताकि गड़ीसर में वर्ष भर पानी भरा हुआ रहे और नौकायन कारोबार चल सके।
-गत कुछ वर्षों से गड़ीसर में नहर का पानी आना बंद हो गया है। करीब तीन साल पहले गड़ीसर को नहर से जोडऩे की एक ओर योजना बनाई गई है, जिसे अमलीजामा पहनाया जाना बाकी है।
-उधर, ट्यूरिस्ट डेस्टिनेशन योजना के तहत बड़ी धनराशि खर्च होने के बावजूद आज भी गड़ीसर तालाब बदहाली का दंश झेल रहा है। -बुजुर्ग बताते हैं कि महारावल रणजीतसिंह के कार्यकाल में संवत् 1913 में बारिश के पानी की आवक को बढ़ाने के लिए काक नदी से गड़ीसर को जोड़ा गया।
-इसके लिए काक नदी पर भारी भरकम पत्थरों का बांध बनाया गया और नदी से गड़ीसर में पानी के लिए एक शाखा निकाली। गड़ीसर तालाब से करीब 14 किमी दूर दक्षिण में निकाली गई शाखा या नहर आज भी वैसी ही पड़ी है।





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