बूंदी। बूंदी में शुक्रवार सुबह बरसाती नाले में कई लोगों के फंस जाने की एक मिथ्या खबर ने जिला प्रशासन के अधिकारियों की खामख्वाह परेड करवा दी। एक न्यूज चैनल पर चली खबर के सत्यापन के लिए नायब तहसीलदार को पुलिस के साथ भेजा गया, तो खबर झूठी निकली। इसके बाद प्रशासन ने सम्बन्धित चैनल से जवाब तलब भी किया है।
अतिरिक्त जिला कलक्टर (प्रशासन) नरेश मालव के अनुसार चैनल पर दबलाना थाना क्षेत्र के रामेश्वरम क्षेत्र के एक नाले में कई लोगों के फंसे होने और कुछ लोगों के बह जाने की खबर प्रसारित की गई। इस पर तत्काल ही नायब तहसीलदार व पुलिस को मौके पर भेजा गया, लेकिन वहां किसी के फंसे होने या बहने की बात सामने नहीं आई। इस पर सम्बन्धित चैनल को इस तरह की सनसनी फैलाने वाली खबरें न चलाने के लिए पाबंद किया गया है।
पट्टों की रेवड़ी बांटने की तैयारी में सरकार
वर्षों से सरकारी भूमि (सिवाचयक) पर मकान बनाकर रह रहे लोगों को मालिकाना हक देने की तैयारी शुरू हो गई। जी हां! ऐसे लोगों को सरकार लाभ देने के साथ शीघ्र पट्टे जारी करेगी। इससे उनको राहत तो मिलेगी साथ ही सरकारी भूमि पर अपना मालिकाना हक मिल सकेगा। इस संबंध में पंचयातीराज विभाग ने आदेश जारी कर दिए।
उक्त आदेश में सरकारी भूमि पर मकान बनाकर रहने वाले लोगों का सर्वे कर पट्टे जारी करने के निर्देश दिए हं। आदेश मिलने के बाद विभागीय अधिकारियों ने सर्वे की कार्रवाई शुरू कर दी है। राज्य सरकार ने आवासीय भू-खंड व आवासीय मकान नहीं होने वाले परिवारों की ओर से सरकारी भूमि पर वर्षों से मकान बनाकर रह रहे लोगों को उनके मकानों के पट्टे देने का मन बनाया है।
इसके लिए सरकार ने राजस्थान पंचायतीराज नियम 1996 के नियम 165 की पालना करते हुए ग्राम पंचायतों को सर्वे व नियमन करने के बाद पट्टे जारी करने के निर्देेश दिए हैं।
यह होंगे नियम
सरकारी भूमि (सिवाचयक) पर 1 जनवरी 2017 को कम से कम तीन वर्ष अथवा इससे अधिक की अवधि से पूर्व सरकारी भूमि पर मकान बनाकर रहे हो। उनको अपना प्रमाण साबित करना होगा। इसके लिए उनको भूमि पर तीन साल तक रहने का प्रमाण पत्र, राशन कार्ड, आधार कार्ड, पहचान पत्र, भामाशाह कार्ड, बिजली-पानी व टेलीफोन आदि के बिल प्रस्तुत करने होंगे।
सरकारी जमीनों पर बढ़ेगी अतिक्रमण होड़
जानकार लोगों ने बताया कि इस प्रकार सरकारी जमीनों पर पट्टे जारी करने अतिक्रमण की होड़ मचेगी। सरकार के इस निर्णय से जमीनों पर लोगों में कब्जे की प्रवृत्ति बढ़ेगी। सरकार के इस निर्णय को जानकारों ने चुनाव आते देख पट्टों की रेवड़ी बांटने की तैयारी बताया है।
‘राजकीय भूमि पर 1 जनवरी 2017 से तीन वर्ष पूर्व बसे लोगों का सर्वे कार्य शुरू कर दिया है। सर्वे के बाद पंचायत से सेटअपार्ट होने की कारवाई की जाएगी। जिससे ग्रामीणों को आबादी के पट्टे जारी किए जाएंगे’। —जुगल किशोर मीणा, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद, बूंदी





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