दलोट जैन आचार्य निपुणरत्न सूरीश्वर मसा आदि ठाणा-2 एवं साध्वी अहर्द रेखा श्रीजी आदि ठाणा 5 का दलोट में नगर प्रवेश शनिवार सुबह होगा। यहां संतों का चातुर्मास होगा। नगर प्रवेश को लेकर जैन समाज की ओर से तैयारियां की गईहै। दलोट श्री संघ की ओर से वाहन रैली निकाली गई। वाहन रैली में नवयुवक मंडल, बालिका मंडल सहित बच्चों ने स्वागत का जय घोष किया। नगर के मुख्य मार्गो में होते हे वाहन रैली भचुंडला पहुंची। जहां संतों का आशीर्वाद लिया। इस मौके पर निनोर चौकी प्रभारी कमलेश शर्मा, सूर्यवीर सिंह आदि मौजूद थे।
धरियावद
दिगम्बर जैन आर्यिका सम्मेद शिखर माता के सान्निध्य में शुक्रवार को मउ अतिशय क्षेत्र में आठ दिवसीय सिद्धचक्र महामंडल विद्यान की शुरूआत हुई।प्रथम दिन सुबह विद्यान से पूर्व भगवान की रथयात्रा निकाली गई। अतिशय क्षेत्र में जिनेन्द्र भगवान का अभिषेक एवं शांतिधारा सहित विविध कार्यक्रम हुए।सुबह आर्यिका सम्मेदशिखर माता का प्रवचन हुआ। समस्त कार्यक्रम एवं विधिपूजन विद्यानाचार्य आदेश्वर जैन एवं पंडित गजेन्द्र पटवा के निर्देशन में हुए। शाम को त्रिलोकीनाथ भगवान की महाआरती सहित भक्तिमय कार्यक्रम हुए।
अधिकमास के कारण चातुर्मास एक माह आगे
प्रतापगढ़. इस बार अधिकमास होने के कारण सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु एक माह देरी से विश्राम करेंगे और एक माह देरी से आएंगे। इससे चातुर्मास भी एक माह देरी से आगे बढ़ जाएगा। इन चार माह में आने वाले तीज-त्योहार 10 से 15 दिन आगे बढ़ जाएंगे। पिछले वर्ष की तुलना में पर्व 10 से 15 दिन की देरी से आएंगे। सनातन परम्परा के अनुसार देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु चार माह तक क्षीरसागर में विश्राम करते हैं। सृष्टि के संचालन की बागडोर भगवान शिव संभालते हैं। इस बार देवशयनी एकादशी 23 जुलाई को है। इसके बाद त्योहारों की श्रृंखला चलेगी। देवउठनी एकादशी 19 नवम्बर को होगी।
यह है चातुर्मास
सनातन परम्परा में देवशयनी एकादशी से देवउठनी एकादशी तक का समय चातुर्मास कहा जाता है। इन चार माह में देव आराधना की जाती है। इसी अवधि में कई तीज-त्योहार भी आते हैं। इस दौरान मांगलिक कार्य पूर्णतया वर्जित होते है। श्रद्धालु साधना-आराधना में लीन होते है। साधु-सन्यासी इन चार माह में एक ही स्थान पर रहकर साधना करते है।
वैवाहिक कार्यक्रमों पर लगेगा विराम
चातुर्मास के कारण वैवाहिक कार्यक्रमों पर भी विराम लग जाएगा। पंडित अजय जोशी ने बताया कि 16 जुलाई तक विवाह के शुभ मुहूर्त है। 23 जुलाई से देवशयनी एकादशी के साथ विवाह, गृहप्रवेश, मुंडन सहित बड़े मांगलिक कार्य बंद हो जाएंगे।
इसकी शुरूआत देवउठनी एकादशी के बाद ही होगी। देवउठनी एकादशी पर गुरू अस्त होने के कारण नवम्बर माह में भी विवाह मुहूर्त नहीं है। दिसम्बर में भी विवाह के दो ही शुभ मुहूर्त रहेंगे।
चातुर्मास के प्रमुख पर्व
जुलाई
23 जुलाई देवशयनी एकादशी
27 जुलाई गुरू पूर्णिमा
28 जुलाई श्रावण मास आरम्भ
अगस्त
11 अगस्त हरियाली अमावस्या
15 अगस्त नागपंचमी
26 अगस्त रक्षाबंधन
सितंबर
02 सितंबर कृष्ण जन्माष्टमी
13 सितंबर गणेश चतुर्थी
23 सितंबर अनंत चतुर्दशी
अक्टूबर
10 अक्टूबर शारदीय नवरात्र
19 अक्टूबर दशहरा
24 अक्टूबर शरद पूर्णिमा
नवम्बर
05 नवम्बर धनतेरस
07 नवम्बर दीपावली
19 नवम्बर देवउठनी एकादशी





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