धीरेंद्र जोशी/ उदयपुर. आचार्य शिवमुनि का महाप्रज्ञ विहार में चातुर्मासिक प्रवेश शनिवार को हुआ। सुबह आयड़ से शोभायात्रा शुरू हुई जो महाप्रज्ञ विहार तक पहुंची। इस दौरान पूरे मार्ग में आचार्य का अभिनंदन किया गया। मार्ग मेंजगह-जगह से लोग जुड़े और महाप्रज्ञ विहार तक पहुंचे समय शोभायात्रा ने भव्य रूप ले लिया। महाप्रज्ञ विहार में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े।
श्री वद्र्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ व आचार्य श्री शिवाचार्य चातुर्मास आयोजन समिति की ओर से यह आयोजन हुआ। श्रमण संघ आचार्य डॉ. शिवमुनि महाराज, युवाचार्य महेन्द्र ऋषि महाराज, शिरीष मुनि, शुभम मुनि आदि ठाणा-10 सहित अन्य मुनियों का चातुर्मासिक प्रवेश हुआ। मार्ग में जगह-जगह स्वागत द्वार बनाकर शोभायात्रा का अभिनंदन करने के साथ ही श्रावक-श्राविकाओं को स्टालों पर खाद्य और पेय पदार्थ वितरित किए गए। चातुर्मास समन्वयक संजय भण्डारी ने बताया कि शोभायात्रा के प्रारम्भ में आचार्य के चित्र बना ध्वज लिए युवक चल रहा थे। इसके बाद 51 बुलेट एवं अन्य दुपहिया वाहनधारी जैन धर्म ध्वज लिये चल रहे थे। शोभायात्रा में युवक मण्डल के सैकड़ों सदस्य हाथों में पताका फहरा रहे थे। 1111 महिलाएं लाल चुन्दड़ में सिर पर कलश लिए चल रही थी। बीच में नन्हें बच्चें स्केटिंग करते चल रहे थे। वाहन में आचार्य की एक झांकी साथ चल रही थी। युवक मण्डल के सदस्य आगे आगे परेड करते हुए चल रहे थे।
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मंगल प्रवेश समिति के सह संयोजक प्रवीण पोरवाल ने बताया कि शोभायात्रा में शहर के विभिन्न उपनगरों से बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने भाग लिया। महाप्रज्ञ विहार में चातुर्मास मुख्य संयोजक विरेंद्र डंागी ने आचार्य का स्वागत किया। प्रचार-प्रसार समिति के संयोजक निर्मल पोखरना ने बताया कि मार्ग सिन्धी समाज, माहेश्वरी समाज, सिक्ख समाज, बोहरा समाज एवं विभिन्न समाजों ने आचाय का अभिनन्दन एवं स्वागत किया।
संकल्प से सिद्धी तक नहीं रूकें : आचार्य
महाप्रज्ञ विहार में आचार्य डॉ. शिवमुनि ने कहा कि उदयपुर में अरिहंतों की कृपा से चातुर्मास प्रवेश हुआ है। भगवान महावीर की वाणी का चार माह यहां सूत्रपात होगा। उन्होंने इस अवसर पर संकल्प से सिद्धी का नारा देते हुए कहा कि यह सिर्फ नारा नहीं वरन् अपने आप से एक वादा करना होगा कि हम संकल्प ले कर सिद्धी तक का मार्ग प्रशस्त करेंगे, पुरुषार्थ करेंगे, कसम खाएंगे कि तब तक नहीं रूकेंगे जब तक जीवन की यह यात्रा महायात्रा नहीं बन जाती। युवाचार्य महेन्द्र ऋषि ने कहा कि आज उदयपुर श्रीसंघ के सौभाग्य का उदय हुआ है। 18 वर्ष की लम्बी तपस्या के बाद उदयपुर श्रीसंघ को यह चातुर्मास आयोजित करने का अवसर मिला। प्रमुख मंत्री शिरीष मुनि ने कहा कि आचार्य का प्रवेश महाप्रज्ञ विहार में ही नहीं अपने दिलों में भी कराना है।





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