सवाईमाधोपुर. 'मिर्जा' के सिर पर 'मुकुंदरा का ताज' सजने के बाद लम्बे समय तक बाघिन शिफ्टिंग एनटीसीए की अनुमति के चक्कर में अटकी रही। हाल ही में अनुमति मिलने के बाद वन विभाग ने बाघिन शिफ्टिंग की तैयारियां जोर शोर से शुरू कर दी है, लेकिन बदलता मौसम एक बार फिर इंतजार लम्बा होने का संकेत दे रहा है। वन विभाग दस दिनों में ही दो बाघिनों को मुकुंदरा शिफ्ट करने की मंशा रखता है, लेकिन मौसम के बेईमान होने से विभाग की भी चिंता बढ़ गई है।
कई समस्याओं का करना पड़ेगा सामना
बारिश के दौरान रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान के मुख्य जोनों में पर्यटन बंद कर दिया जाता है। बारिश का समय वन्यजीवों का प्रजनन काल माना जाता है। इसके साथ ही जगह-जगह पर पानी भर जाने से वाहनों के आने जाने में परेशानी के साथ ही वन्यजीवों का दिखाई देना भी मुश्किल हो जाता है। वहीं जंगल में पेड़ पौधों में हरियाली छाने के साथ ही पत्ते भी घने हो जाते है जो वन्यजीवों के छिपने के लिए काफी मुफिद होते है। ऐसे में बाघिन को ट्रेंकुलाइज करना काफी मुश्किल होगा।
बाघिन टी-102 का जाना लगभग तय
अब तक दोनों बाघिनों का चयन नहीं किया गया है, लेकिन वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार बाघिन 102 का मुकुंदरा जाना लगभग तय माना जा रहा है। वन अधिकारियों ने शिफ्टिंग के लिए बाघिन टी-102 के नाम पर मोहर लगा दी है। इसके अलावा टी-99, एरोहेडेड, लाइटिंग आदि के नामों पर भी चर्चा की जा रही है।
पूर्व में भी अटक गया था मामला
रणथम्भौर से दो बाघिनों को मुकुंदरा शिफ्ट करने का मामला एक बार पहले भी अटक गया था। पूर्व में अप्रेल में विभाग की ओर से शिफ्टिंग की कवायद शुरू की थी, लेकिन उस समय एनटीसीए ने शिफ्टिंग को लेकर आपत्तियां जताते हुए बाघिन शिफ्टिंग की अनुमति नहीं दी थी।
इसलिए किया चयन
वन अधिकारियों ने बताया कि वे मुकुंदरा में तीन साल तक की बाघिनें शिफ्ट कराना चाहते हैं। टी-102 की उम्र करीब ढाई साल है और यह बाघिन वर्तमान में अपनी टेरेटरी से बाहर जोन 10 में विचरण कर रही है। कुछ इस प्रकार के हाल ही बाघिन टी-99 के भी है। यह बाघिन भी करीब तीन साल की है। इसें बाघिन टी-60 की संतान माना जाता है और यह भी वर्तमान में जोन दस में विचरण कर रही है।
- बाघिनों की शिफ्टिंग की तैयारी की जा रही है। इसके लिए टी-102 का नाम फाइनल किया गया है। जल्द ही दूसरी बाघिन भी फाइनल हो जाएगी। बारिश से थोड़ी परेशानी तो होगी, लेकिन विभाग की कोशिश है कि बारिश बढऩे से पहले ही बाघिन शिफ्ट कर दी जाए।
मुकेश सैनी, उपवन संरक्षक, रणथम्भौर बाघ परियोजना, सवाईमाधोपुर





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