धौलपुर। अब बजरी माफियाओं को सबसे ज्यादा बारिश का डर सता रहा है। बरसात के शुरू होते ही धौलपुर और चंबल नदी से सटे मुरैना जिला इन दिनों बजरी माफियाओं का अड्डा बना है। इस इलाके में माफिया इस कदर सक्रिय हैं कि रात-दिन एक कर बजरी के काले कारोबार से चांदी बटोरने में लगे हैं।
अवैध बजरी का पनप रहा कारोबार
बजरी के अवैध खनन व परिवहन पर रोक के दावे खोखले साबित होते जा रहे हैं। माफियाओं ने चंबल किनारे खेतों में रेते का कई किलोमीटर तक स्टॉक लगा रखा है। यह माजरा चंबल किनारे आसानी से देखा जा सकता है। यहां सीमावर्ती मुरैना जिले में चंबल पुल के पास सैकड़ों की संख्या में ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का बजरी परिवहन के लिए जमावड़ा लगा रहता है। लेकिन पुलिस-प्रशासन भी कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति करने में लगा है। शीर्ष कोर्ट की रोक के बाद पनप रहे बजरी के कारोबार ने न्यायालय के आदेशों को हवा में उड़ा दिया है।
घड़ियालों के भविष्य पर संकट के बादल
बजरी खनन से घडिय़ाल साइटों को नुकसान पहुंच रहा है। दरअसल, यह अभ्यारण घड़ियालों के लिए प्रसिद्ध है। वन्यजीव विशेषज्ञों की मानें तो घडिय़ाल बारीक रेत में पनपते हैं। लेकिन बजरी का खनन होने से बारीक रेत नहीं खत्म हो रहा है। इस क्षेत्र में अवैध बजरी खनन पर जल्द रोक नहीं लगी तो घडिय़ालों को नुकसान पहुंच सकता है। इधर, चंबल वन्य जीव अभयारण्य के अंतगर्त सवाईमाधोपुर, कोटा, बूंदी, करौली व धौलपुर जिले आते हैं। इसे राज्य सरकार ने वर्ष 1983में वन्य जीव अभयारण्य घोषित किया था।
बजरी के और बढ़ेंगे दाम
बजरी के दामों में और तेजी होने की उम्मीद है। पहले जो बजरी की ट्रॉली 2 से 2500 रुपए में मिल जाती थी। वह अब 4 से 5 हजार रुपए में बिक रही है। जिले में लम्बे समय से चोरी-छिपे बजरी का बाजार पनप रहा है। पुलिस के डर से रात के अंधेरे में ट्रैक्टरों से निर्माण कार्यों तक बजरी पहुंच रही है। हालांकि कानून की सख्ती के बाद से लोग पार्वती नदी की लाल बजरी व केशर की गिट्टियों की पिसी बजरी का भी प्रयोग करने लगे हैं। मानसूनी बरसात शुरू होने से चंबल बजरी के दामों में और उछाल आ सकता है।





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