मलारना डूंगर/ सवाई माधोपुर। उपखण्ड के मलारना चोड़ कस्बे में इन दिनों बन्दरों के आतंक से लोग दहशत में हैं। महिला व बच्चे अब छतों पर चढ़ने से भी कतराने लगे हैं। जैसे ही बन्दर किसी महिला या बच्चे को अकेला देखते हैं। उस पर हमला कर देते हैं।
सोमवार सुबह भी बन्दर ने छत पर गई एक बुजुर्ग महिला पर हमला कर जख्मी कर दिया। मलारना चोड़ निवासी रामावतार मीणा ने बताया कि पामेला मोहल्ला निवासी राम कन्या (62) पत्नी शंकर लाल मीणा सुबह 8 बजे के लगभग छत पर खाना बनाने की तैयारी कर रही थी। इस दौरान एक बन्दर ने उस पर हमला कर दिया। बन्दर के काटने से महिला के शरीर में जगह जगह जख्म हो गए। पता चलने पर ग्रामीणों से शोर शराबा कर बन्दर को भगाया तथा घायल महिला को मलारना चोड़ अस्पताल में भर्ती कराया। जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे सवाईमाधोपुर रैफर कर दिया गया।
साल डेढ़ साल से लापता दो बाघ
सरिस्का बाघ परियोजना से एक बाघिन एसटी 5 लापता हुई। सूचना पर जहां पूरा वन विभाग हिल गया, वहीं दूसरी ओर यह खबर आग की तरह पूरे राजस्थान में फैल गई। बाघिन की तलाश शुरू हुई जो अब तक जारी है, लेकिन रणथम्भौर के दो बाघ डेढ़ साल से लापता हैं, लेकिन इन्हें तलाशने की जगह वन विभाग इंतजार में है कि वह वापस लौट आएंगे। इस आस में विभाग ने उन्हें तलाशने के लिए कोई कदम भी नहीं उठाए हैं।
यह है कालू-धोलू का इतिहास
रणथम्भौर की प्रसिद्ध बाघिन नूर टी 39 व सज्जनगढ़ बॉयोलोजिकल पार्क भेजे गए बाघ उस्ताद टी 24 के दो शावक 24 मई 2014 को जन्मे थे। विभाग ने इन्हें टी 88 व टी 89 नाम दिया। कुछ समय बाद उस्ताद को रणथम्भौर से सज्जनगढ़ शिफ्ट कर दिया गया। ऐसे में यहां नए बाघ टी 57 ने अपनी टेरेटरी बना ली, लेकिन नूर के साथ दोनों शावकों को मारने की अपेक्षा उनके साथ ही रहा।
अमरेश्वर वन क्षेत्र की ओर रहा मूवमेंट
जोन एक व दो टी-57 के दबदबा बना लेने के बाद दोनों शावक रणथम्भौर की बाहरी सीमा अमरेश्वर वन क्षेत्र, झूमर बावड़ी आदि इलाकों में विचरण करने लगे।





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