चित्तौडग़ढ़. मंदसौर हो या सतना या फिर बीकानेर, मासूम बेटियों से दुष्कर्म की घटनाएं मीडिया की सुर्खियां बनने के साथ ऐसी बेटियों के अभिभावकों को हिला कर रख देने वाली है। बेटियों से दुष्कर्म की घटनाओं पर रोष जताने एवं दोषियों को फांसी देने की मांग को लेकर मोमबत्तियां हाथ में उठाने से लेकर प्रदर्शन तक कम नहीं हो रहे है। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर हम मासूम बच्चियों की सुरक्षा के प्रति बेपरवाह बने हुए है। शिक्षा संस्थान हो या अभिभावक सभी स्तर पर लापरवाही प्रदर्शित की जा रही है। शहर में बालिका स्कूलों व महाविद्यालयों के बाहर सुरक्षा के नाम पर भी ठोस व्यवस्था का अभाव है। कोर्ई घटना होने पर सजग होने वाली पुलिस यहां भी बेठियों की सुरक्षा के लिए किसी बड़े हादसे के इंतजार में लगी है। अनजाने खतरे हमारी बेटियों के सिर पर मण्डरा रहे है,जिनके बारे में भी उसे ज्यादा अहसास नहीं है। जब से स्मॉर्ट फोन आया है,बेटियां पलक झपकते ही अनजाने कैमरों में कैद हो रही है। शहर में मासूम बच्चियों को किसी खतरे को पहचानने के लिए गुडटच-बैडटच की जानकारी भी कम ही है।
किस तरह की हो रही बेपरवाही
- बालिका स्कूलों के बाहर भी सीसीटीवी कैमरे नहीं है। बाहर कौन बेटियों को छोडऩे व लेने आ रहा पता नहीं होता।
- बेटियां जिन ऑटोरिक्शा व बसों में स्कूल पहुंचती है उनमें से कई में भी कोई महिला नहीं होती है।
- सरकारी व निजी विद्यालयों में ३ से १२ वर्ष तक की सैकड़ो बेटियां ऐसी है जिन्हें अब भी गुडटच-बैडटच के बारे में कभी नहीं समझाया गया है।
- बालिका शिक्षा केन्द्रों के बाहर सुरक्षा का अभाव होने से अवांछनीय तत्व सक्रिय रहते है एवं अप्रिय घटना का खतरा बना हुआ है।
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आंकड़ो में कहा है हमारी आधी दुनिया
- नेशनल फैमिली हैल्थ सर्वे-४ २०१५-१६ के अनुसार राजस्थान में प्रति हजार पुरूष महिलाओं की संख्या ९७३ है।
- नेशनल फैमिली हैल्थ सर्वे-४ के अनुसार राज्य के शहरी क्षेत्रों में तो लिंगानुपात मात्र ९२८ रह गया है।
- चित्तौडग़ढ़ जिले में वर्ष २०११ की जनगणना के अनुसार प्रति एक हजार पुरूषों पर ९७२ महिलाएं है। ये अनुपात वर्ष २००१ में प्रति हजार ९६६ था।
- चित्तौडग़ढ़ जिले में ० से ६ वर्ष तक के बच्चों का बाल लिंगानुपात भी वर्ष २०११ की जनगणना के अनुसार प्रति एक हजार बालक पर ९१२ बालिकाएं था। ये अनुपात वर्ष २००१ में प्रति हजार ९२९ था।





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