Breaking News
recent

उपभोक्ता की ऋण राशि हजम कर रहें भूमि विकास बैंक के संविदाकर्मी, देखिए कैसे पुलिस जांच में खुलासा हुआ इनका

राजसमंद. उपभोक्ता के ऋण की राशि बैंक में जमा करने की बजाय राजसमंद भूमि विकास बैंक राजसमंद के संविदाकर्मी द्वारा हजम करने का मामला सामने आया। बैंक से बकाया ऋण जमा कराने का नोटिस जारी होने पर पीडि़त उपभोक्ता ने ऋण जमा का (नो ड्यू) प्रमाण पत्र पेश कर दिया। फिर भी न तो बैंक ने कार्मिक से वसूली की और न ही कोई कार्रवाई। धोखाधड़ी का थाने में प्रकरण दर्ज होने के बाद पुलिस ने जांच में सवा 6 लाख का गबन निकला।
पुलिस के अनुसार कल्लाखेड़ी निवासी भीम सिंह पुत्र सोहनसिंह ने राजसमंद भूमि विकास बैंक से ऋण लिया। बाद में भीमसिंह द्वारा भूमि विकास बैंक को सारा ऋण जमा करवाते हुए नो ड्यू प्रमाण पत्र प्राप्त कर लिया। फिर उसी आधार पर पंजाब नेशनल बैंक से भूमि रहन रखकर ऋण ले लिया। उसके बाद भूमि विकास बैंक द्वारा भीम सिंह को नोटिस जारी किया गया कि अवधिपार ऋण जमा कराया जाए। अन्यथा भूमि नीलामी की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। बैंक का नोटिस देख कर भीमसिंह सन्न रह गए। फिर बैंक में जाकर तकाजा किया, तो बैंक खाते में ऋण जमा ही नहीं हो हुआ। पीडि़त ने बताया कि उसने सारा ऋण भंवरलाल बारबर को जमा करवा दिया और उसकी रसीद और नो ड्यू प्रमाण पत्र है। फिर भी बैंक द्वारा आरोपित कार्मिक से वसूली नहीं की और न ही उपभोक्ता का बकाया ऋण जमा किया। इससे आहत होने के बाद नाथद्वारा थाने में भूमि विकास बैंक के भंवरलाल बारबर के खिलाफ धोखाधड़ी की रिपोर्ट दी। पुलिस ने जांच के बाद आरोपित भंवरलाल को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया, जहां से जेल भेज दिया गया। पुलिस द्वारा की गई जांच के मुताबिक 6 लाख 25 हजार 6 25 रुपए का कार्मिक बारबर द्वारा गबन करना सामने आया। हालांकि पुलिस आरोपित से गबन की राशि वसूल नहीं कर पाई। इस पर पुलिस ने गत 26 जून को नाथद्वारा अदालत में आरोप पत्र पेश कर दिया।
आरोपित नहीं, फिर भी अग्रिम जमानत
पुलिस की जांच के दौरान भूमि विकास बैंक के शाखा सचिव रामेश्वर प्रसाद ने अदालत में गिरफ्तारी से बचने के लिए अग्रिम जमानत ले ली। पुलिस में दर्ज प्रकरण में न तो रामेश्वर का नाम था और न ही पुलिस की जांच में ही उसे आरोपित बताया। हालांकि बाद में अग्रिम जमानत को नोट पे्रस कर लिया। यह बात खासी चर्चित रही।
सेवानिवृति के बाद फिर नियुक्ति
वित्तीय अनियमितता का आरोप लगने, गिरफ्तारी के बाद जेल जाने के बावजूद संविदा के आधार पर भंवर लाल बारबर को फिर ज्वाइनिंग दे दी। बैंक में गबन का प्रकरण दर्ज होने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से बैंक के अफसरों की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
गबन करने पर किया गिरफ्तार
&ऋण राशि जमा लेकर बैंक में जमा कराने की बजाय गबन कर लिया। जांच में यह तथ्य स्पष्ट होने के बाद आरोपित को गिरफ्तार कर लिया। जांच पूरी होने के बाद अदालत में आरोप पत्र पेश कर दिया। यह रोचक तथ्य रहा कि प्रकरण में जो आरोपित ही नहीं था, बैंक के उस कार्मिक ने अदालत से अग्रिम जमानत ले ली।
रविन्द्रसिंह, अनुसंधान अधिकारी थाना नाथद्वारा



Rajasthan Darpan IFTTT

Rajasthan Darpan IFTTT

No comments:

Post a Comment

Powered by Blogger.