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जिस खेत में रकबर से हुई मारपीट, वहां मिला कुछ ऐसा, जानकर आप भी रह जाएंगे दंग

ललावंडी गांव गोतस्करों के लिए सुगम मार्ग बना हुआ था। गोतस्कर आसपास इलाकों से गायों को गोकशी के लिए रात के अंधेरे में पैदल-पैदल ललावंडी के रास्ते हरियाणा ले जाते थे। इस बात का प्रमाण हर दूसरे-चौथे दिन मिलता था। खेतों की मिट्टी में गाय और इंसानी पैरों के निशान छपे मिलते थे। इस बात का पता चलने के बाद ही कुछ लोगों ने गोतस्करों को पकडऩे की योजना बनाई। गत 20 जुलाई की रात कुछ लोगों ने ललावंडी से गाय ले जा रहे रकबर को पकड़ा और फिर मॉब लिचिंग की घटना की अंजाम दिया। जिस खेत में मॉब लिंचिंग हुई पत्रिका टीम ने बुधवार को उसके मालिक से बातचीत की तो उन्होंने ने खेतों में अक्सर गाय और इंसानी पैरों के निशान मिलने की पुष्टि की।

खेत मालिक ललावंडी निवासी कैलाश यादव ने बताया कि सर्दी में उन्होंने अपने खेत में सरसों की फसल लगाई हुई थी। रात के अंधेरे में गोतस्कर यहां से गाय लेकर हरियाणा की तरफ निकलते थे। अगले दिन सुबह खेतों में गायों के और इंसानी पैरों के निशान मिट्टी में छपे मिलते थे। साथ ही ये लोग फसल को भी खराब कर जाते थे। इसके बाद बाजरे की फसल बोयी तो उसमें भी गाय और इंसानी पैरों के निशान मिलते थे। गोतस्कर देर रात हर दूसरे-चौथे दिन गायों को यहां से लेकर जाते थे। उल्लेखनीय है कि खेत मालिक कैलाश यादव के पुत्र धर्मेन्द्र को पुलिस ने मॉब लिंचिंग मामले में गिरफ्तार किया है।

कभी दो तो कभी चार गायों के निशान

खेत में कभी दो तो कभी तीन या चार गायों के पैरों के निशान खेत में छपे मिलते थे। इनके साथ-साथ दो इंसानी पैरों के निशान भी मिलते थे। ये पैरों के निशान गांव से हरियाणा की ओर जाते मिलते थे।

दो दिन पहले भी मिले थे निशान

यादव के मुताबिक मॉब लिंचिंग की घटना से दो दिन पहले भी उनके खेत के पास से होकर गोतस्कर गायों को पैदल-पैदल लेकर निकले थे। जिनके पैरों के निशान खाली खेत की गीली मिट्टी में छप गए। अगले दिन जब वह खेत पर गया तो उन्होंने वहां गायों और इंसानी पैरों के निशान छपे देखे।



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