नोखा/पांचू. हे रामड़ा खोटी करी रे...हमे ई छोटे बच्या री कुण धणी हुई रे...जोर-जोर से दहाड़ मारकर रोते हुए इतना ही बोल पाती है परमा...फिर वह बेहोश हो जाती है। उसके पास बैठी महिलाएं उसके मुंह पर पानी के छींटे मारते हुए उसे होश में लाने का प्रयास करते हुए ढांढ़स बंधाते का प्रयास करते हुए खुद भी रोने लगती है।
कुछ ऐसा ही ह्रदय विदारक दृश्य देखने को मिला शुक्रवार को पांचू के पुरखाराम नायक की ढाणी में। यहां पर गुरुवार को हुए दर्दनाक हादसे के बाद मृतक पुरखाराम के घर पर मातम छाया हुआ है। दो कच्ची झोपडिय़ों के सामने चार-पांच महिलाएं व पुरुष शोकाकुल होकर बैठे थे। उनसे कुछ दूरी पर ही मृतक पुरखाराम के छोटे मासूम बेटे-बेटियां भी उदास चित्त मन से बैठे थे। जैसे कोई जाता है तो वे उसको टकटकी लगाकर देखने लगते है, मानो वे अपनी मां के स्वस्थ होकर लौटने का इंतजार कर रहे हो। मृतक पुरखाराम की आठ संतानों में से बड़े बेटे-बेटियों को तो पूरे घटनाक्रम का पता है, लेकिन जो छोटे है, उनको इस बारे में कुछ नहीं पता है। उनके भरोसे तो मां-बापू गांव गए हुए है। जल्द ही लौटकर घर आएंगे। उन मासूमों को क्या पता कि उनके पिता अब इस दुनिया में नहीं रहे है, वे कभी वापस लौटकर नहीं आएंगे और मां अस्पताल में पड़ी हुई जिदंगी व मौत से संघर्ष कर रही है।
मां के लौटने का इंतजार
मृतक पुरखाराम के बड़े बेटे दुलाराम ने बिलखते हुए बताया कि वह तो बीमार रहता है। मां ही जैसे-तैसे कर घर को चलाती थी। उनके घर में आज खाने को अनाज नहीं है। उनकी मां अस्पताल में भर्ती है, उसके स्वस्थ होकर वापस लौटने का वे इंतजार कर रहे है।
मासूमों बेटियों का कौन भरेगा पेट
मृतक पुरखाराम के आठ संतान है, जिसमें तीन बेटे व पांच बेटियां हैं। तीन बेटियों परमा, रेवती व बाला की शादी हो चुकी है और दो बेटियां नारायणी व राजू अभी कंवारी है। शादीशुदा तीनों बेटी तो कुछ दिन बाद ससुराल लौट जाएंगी, लेकिन उन दो मासूम बेटियों का अब कौन पेट भरेगा। वहीं तीन बेटों में बड़े बेटे दुलाराम शुगर रोगी है और उसकी पत्नी भी उसे छोड़कर जा चुकी है। छोटे दो बेटे कानाराम व ओमाराम अभी कंवारे हैं। इस परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है और परिवार में बचे हुए पांच सदस्यों के सामने पेट भरने के भी लाले पड़ रहे है।





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